'पाकिस्तान को अमेरिकी मांग नहीं माननी चाहिए'
उर्दू दैनिक नवा-ए-वक्त ने अपनी संपादकीय में कहा है, "एक वर्ष से अधिक समय से अमेरिका हमसे उत्तरी वजीरिस्तान में कार्रवाई करने के लिए कहता आ रहा है। अब उसने हमारे राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर इसके लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।"
संपादकीय में लिखा है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने उत्तरी वजीरिस्तान को अलकायदा एवं तालिबान आतंकियों के लिए मजबूत पनाहगाह बताया था और पाकिस्तान से इस इलाके में तीव्र सैन्य कार्रवाई की मांग की थी। अमेरिका के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन ने भी पाकिस्तानी सेना प्रमुख असफाक परवेज कयानी को इस इलाके में तीव्र कार्रवाई करने के लिए लिखा था।
संपादकीय में दावा किया गया है, "इसके जवाब में जनरल कयानी ने किसी तरह की कार्रवाई करने की बात को खारिज कर दिया था।" संपादकीय में कयानी के इस रुख को सही ठहराया गया है।
संपादकीय में लिखा है, "इस तथाकथित आतंक के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान पहले ही काफी नुकसान उठा चुका है और अब और अधिक नुकसान उठाने की कोई गुजाइश नहीं है। एक तरफ तो अमेरिका अफगानिस्तान में अपनी लड़ाई को समेट रहा है और उस देश से वापसी की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह पाकिस्तान में लड़ाई फैलाने की कोशिश कर रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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