विदेशी पूंजी प्रवाह से निर्यातक चिंतित
जानकारों का कहना है कि यदि रुपया इसी तरह मजबूत होता रहा तो निर्यातकों के मुनाफे पर बेहद बुरा असर पड़ेगा और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी। इसके अलावा उनके भविष्य के विदेशी ठेके भी रद्द हो सकते हैं।
शुक्रवार को रुपया पिछले दिन की तुलना में 0.2 प्रतिशत 44.04 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। अगस्त 2008 के 43.96 रुपये के स्तर के बाद का सबसे मजबूत स्तर है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने रुपये में 5.3 प्रतिशत की मजबूती आई। पिछले महीने विदेशी निवेशकों ने देश के शेयर बाजारों में 23 अरब डॉलर और कर्ज बाजार में 10 अरब डॉलर का निवेश किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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