पश्चिम बंगाल में श्रद्धालुओं ने दी मां दुर्गा को विदाई
इस दौरान गंगा और अन्य नदियों का नजारा अत्यंत मनोहारी था। देवी और उनके पुत्रों लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिक की मूर्तियों के विसर्जन के लिए नदी तट पर पूजा आयोजक जूलुस के साथ पहुंचे थे। रंग-बिरंगी पताकाओं और ढोल-नगाड़ों की आवाजों ने अनोखा दृश्य उपस्थित किया।
सैकड़ों की संख्या में भक्तों और छोटे बच्चों ने मूर्तियों को जल में विसर्जित किया। मूर्तियों के विसर्जन के साथ ही राज्य के सबसे बड़े धार्मिक त्योहार का समापन हो गया। भक्तों ने देवी को अगले वर्ष फिर से आने का न्योता दिया।
मूर्ति का विसर्जन देवी के अपने माता-पिता के घर थोड़े दिन के निवास का प्रतीक है। इसके बाद देवी अपने पति भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत पर चली जाती हैं।
पुलिस ने बताया कि नदी के तटों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नावों को तैयार रखा गया था।
सुबह के समय शादीशुदा महिलाओं ने देवी और उनके पुत्रों पर सिंदूर छिड़का और उन्हें मिठाइयां भेंट कर अपने परिवार और पति की खुशी के लिए प्रार्थना किया।
उधर, मिठाई की दुकानों पर लोगों की काफी भीड़ देखी गई। लोग एक दूसरे को 'शुभो विजया' की बधाई दे रहे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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