कराची हिंसा में 27 की मौत (लीड 3)

इस्लामाबाद, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची में विधानसभा की एक सीट पर रविवार को हो रहे उपचुनाव के पहले शनिवार की रात भड़की हिंसा की विभिन्न घटनाओं में कम से कम 27 लोग मारे गए हैं और 60 से अधिक घायल हो गए हैं।

माना जा रहा है कि मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) और अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के बीच राजनीतिक दुश्मनी के कारण अधिकत्तर लोगों की हत्या हुई है।

एएनपी के सिंध प्रमुख, शाही सैयद ने शनिवार शाम एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और घोषणा की कि उनकी पार्टी विरोधस्वरूप चुनाव का बहिष्कार करेगी। उन्होंने कहा, "प्रांतीय सरकार कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण कर पाने में विफल साबित हुई है और हम नहीं समझते कि इस तरह के माहौल में चुनाव उचित है।"

एमक्यूएम के केंद्रीय नेता वसीम आफताब ने कहा कि "पीएस-94 सीट एमक्यूएम से संबंधित है, क्योंकि उस सीट से हमारे उम्मीदवार भारी बहुमत से जीतते रहे हैं। एएनपी हार की डर से चुनाव से भागना चाहती है और इसलिए वह बहानेबाजी कर रही है।"

इन उत्तेजक बयानों के बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में टकराव शुरू हो गया और दोनों पार्टियों के समर्थकों ने मतदान पूर्व अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश में अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।

पुलिस ने कहा कि एक भीड़ ने पांच वाहनों को आग लगा दी और शहर जैसे थम-सा गया।

मजेदार बात यह है कि एमक्यूएम और एएनपी, सिंध में सत्ताधारी गठबंधन के सदस्य हैं, जिसका नेतृत्व पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) कर रही है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी पीपीपी के सहअध्यक्ष हैं।

इसके पहले सिंध रैंजर्स के एक प्रवक्ता ने रविवार के मतदान के दौरान गोलीबारी और आत्मघाती हमले की चेतावनी दी थी। लेकिन निर्वाचन आयोग ने घोषणा की कि मतदान अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगा।

पुलिस अधिकारी फैयाज लेघारी ने कहा कि पुलिस और रैंजर्स के संयुक्त दल को स्थिति पर नियंत्रण के लिए तैनात किया गया। पीएस-94 में मतदान सुचारु रूप से चल रहा है और फूल-प्रूफ सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं।

ओरंगी कस्बा एमक्यूएम का मजबूत गढ़ रहा है और सीट का एक बड़ा हिस्सा इसी इलाके में पड़ता है, इसलिए निष्पक्ष उप चुनाव कराने के लिए एएनपी ने सेना की तैनाती की मांग की थी। मांग न माने जाने पर उसने चुनाव का बहिष्कार कर दिया।

एमक्यूएम के उम्मीदवार सैफुल्ला खालिद ने कहा कि "विरोधियों ने मतदान केंद्रों पर मतदाताओं का प्रवेश रोकने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।"

उर्दू भाषी एमक्यूएम और पश्तो भाषी एएनपी के बीच कराची पर राजनीतिक नियंत्रण को लेकर कई वर्षो से प्रतिद्वंद्विता चल रही है।

स्थानीय समाचार चैनल 'जियो न्यूज' के मुताबिक शहर में चारों तरफ तनाव व्याप्त है और पुलिस अभी तक स्थिति से निपटने में नाकाम साबित हुई है।

उल्लेखनीय है कि एमक्यूएम के रजा हैदर की हत्या के बाद यह सीट खाली हुई है। इसी वर्ष जुलाई में उनकी हत्या कर दी गई थी। एमक्यूएम ने आरोप लगाया है कि हैदर की हत्या के पीछे एएनपी का ही हाथ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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