राजनीतिक स्वार्थ के लिए भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग : भागवत
विजया दशमी के अवसर पर संघ के वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, "पंथ, प्रांत, भाषा की हमारी विविधताओं को आपस में लड़ाकर मत बटोरने वाले यही कुछ लोग, एक तरफ मुख से 'सेक्युलरिज्म' का जयकारा लगाकर, बड़ी-बड़ी गोलमटोल बातें करते हुए सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का षडयंत्र रच रहे हैं और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के प्रयत्नों में बाधा डालते रहते हैं।"
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के चलते कुछ आतंकी घटनाओं में कुछ हिन्दू व्यक्तियों की तथाकथित संलिप्तता को लेकर 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' जैसे शब्दों का प्रयोग प्रचलित करने का देशघाती षड्यंत्र रचा जा रहा है।
उन्होंने कहा, "इसमें संघ को भी गलत नीयत से घसीटने का दुष्ट प्रयास हो रहा है। असत्य के मायाजाल में जनता को भ्रमित करने तथा हिन्दू संगठनों को बदनाम करने की यह कुचेष्टा किनके इशारे पर चल रही है व किनको लाभान्वित कर रही है इसको जानने का हमने प्रयत्न नहीं किया है। परंतु यह किसी को लाभान्वित करने के स्थान पर अपने राष्ट्र को अपकीर्ति व आपत्ति में डालेगी यह निश्चित है।"
भागवत ने कहा कि संघ व अन्य संगठनों को कलंकित करने की यह चेष्टा असफल ही होगी। न्यायालय के निर्णय के पूर्व ही संघ को कलंकित करने का प्रयास करने वाली शक्तियों को खुद अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। "ये लोग अपने राजनीतिक स्वार्थो के लिए भगवा आतंक शब्द का प्रयोग करके भारत की श्रेष्ठ परंपरा और सभी संत महात्माओं का अपमान करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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