खालिदा को आवास खाली करने का नोटिस
सरकार की ओर से खालिदा को एक नोटिस दिया गया है। इस नोटिस ने सरकार और मुख्य विपक्षी दल के बीच विवाद की जमीन तैयार कर दी है।
खालिदा के अधिवक्ता और सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष खोंडकेर महबूब हुसैन ने इस बात की संभावना जताई है कि सरकार मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी।
हुसैन ने कहा, "मैं 'बंगबंधु की पुत्री' और प्रधानमंत्री शेख हसीना से 'मानवीय आधार' पर इस मामले पर विचार करने का अनुरोध करता हूं। उच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद उन्हें दरियादिली दिखानी चाहिए।"
उधर, कानून मंत्री शफीक अहमद ने खालिदा के अधिवक्ता के अनुरोध को ठुकरा दिया है। अहमद ने कहा, "मानवीय आधार पर विचार केवल ऐसे गरीब लोगों के लिए किया जाता है जिनके पास रहने के लिए घर नहीं होता।"
समाचार पत्र 'न्यू एज' के मुताबिक कानून मंत्री ने जानना चाहा है कि न्यायालय के निर्णय का पालन करने में खालिदा को परेशानी क्यों हो रही है जबकि वह स्वयं इस मामले को लेकर न्यायालय में गई थीं।
हसीना सरकार ने सैन्य क्षेत्र में आवासों के आवंटन में विसंगतियां पाए जाने पर ढाका के 6-मैनुयल रोड स्थित खालिदा के आवास का आवंटन अप्रैल, 2009 में रद्द कर दिया था।
सरकार के इस नोटिस को चुनौती देते हुए खालिदा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा को यह आवास उनके पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर्रहमान की वर्ष 1981 में हुई हत्या के बाद आवंटित किया गया था।
उधर, हसीना का कहना है कि उन्हें खालिदा के आवास की आवश्यकता है क्योंकि वह इस आवास की जगह सेना के उन 57 अधिकारियों के परिजनों के लिए आवास बनाना चाहती हैं जो पिछले साल फरवरी में सीमा पर हुए विद्रोह में मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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