सर्वोच्च न्यायालय जाएगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (लीड-1)

यह घोषणा बोर्ड की 51 सदस्यीय कार्यकारिणी की शनिवार को दारुल-उलूम, नवा-तुल-उलेमा (नदवा) में हुई बैठक के बाद की गई। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष सैयद राबे हसन नदवी ने की।

बैठक की समाप्ति के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोर्ड के महासचिव अब्दुल रहीम कुरैशी ने कहा, "कार्यकारिणी की बैठक में अयोध्या विवाद पर आए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के फैसले की समीक्षा गई। विचार-विमर्श और आपसी सहमति के बाद उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का फैसला लिया गया।"

उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी ने माना कि अदालत के फैसले में कई कमियां हैं और बोर्ड का दायित्व है कि वह इनके निराकरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए।

सूत्रों के मुताबिक बोर्ड की कानूनी समिति ने नौ अक्टूबर को नई दिल्ली में हुई बैठक में अयोध्या मामले पर उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की सिफारिश की थी। उस सिफारिश पर शनिवार को बोर्ड की बैठक में मुहर लगा दी गई।

बोर्ड के पदाधिकारियों के मुताबिक बैठक में कार्यकारिणी ने बोर्ड ने अध्यक्ष और महासचिव को अधिकार दिया है कि वह तय करें कि क्या बोर्ड स्वयं सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेगा या इस मामले में पक्षकारों की मदद भी ली जाएगी।

समझ्झौते के सवाल पर कुरैशी ने कहा, "अगर कोई बातचीत का ठोस प्रस्ताव रखेगा तो बोर्ड उस पर शरीयत और संविधान की रोशनी में बात करने पर विचार करेगा।" उन्होंने बताया कि इस बैठक में देशभर के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

अयोध्या विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष के सबसे पुराने वादी हाशिम अंसारी द्वारा किए जा रहे सुलह के प्रयासों के बारे में पूछे जाने पर कुरैशी ने कहा कि हाशिम जो कर रहे हैं, वह उनका व्यक्तिगत प्रयास है.. बोर्ड का उससे कोई लेना-देना और मतलब नहीं है।

उन्होंने बताया कि फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के निर्णय के साथ ही एक नए वकील की तलाश शुरू हो गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बाबरी एक्शन कमेटी की तरफ से इस मामले में जफरयाब जिलानी वकील रहे हैं।

कुरैशी ने कहा कि अब मामला सर्वोच्च न्यायालय में जाने के बाद हमें एक वकील की जरूरत पड़ेगी। हम लोगों ने काबिल वकील की तलाश शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा पहले ही कर चुका है।

उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने 30 सितम्बर को अयोध्या में विवादित जमीन का एक तिहाई हिस्सा हिंदू महासभा को, एक तिहाई निर्मोही अखाड़े को और बाकी एक तिहाई हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने का फैसला सुनाया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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