सुरक्षा बलों में लैंगिक पूर्वाग्रह खत्म हो : चिदम्बरम
चिदम्बरम ने राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम समय में राजधानी के बाजारों की सुरक्षा में लगाई गई नागालैंड पुलिस की महिला बटालियन की सराहना करते हुए कहा, "महिलाओं को यदि सही तरीके से प्रशिक्षण, साधन और सही अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे पुरुषों की तरह जीवन के सभी क्षेत्रों में न्याय कर सकती हैं।"
नागालैंड आर्म्ड पुलिस की 15 वीं बटालियन की करीब 700 महिलाओं को प्रदेश में उग्रवाद के खिलाफ अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इन्हें खेलों के दौरान बाजारों की सुरक्षा में लगाया गया था।
इस नई बटालियन में पुलिस अकादमी के नए बैच से निकली 18 से 25 साल की महिलाओं को लिया गया है।
कमांडेंट मीरेन जमीर ने कहा कि ये महिलाएं अभी जंगल में लड़ाई के लिए आधुनिक हथियारों से लड़ाई के तरीकों का प्रशिक्षण ले रही हैं। इन्हें दीमापुर से दिल्ली अपने पहले काम के लिए भेजा गया था।
इन महिलाओं के शानदार काम से प्रभावित चिदम्बरम ने उन्हें एक विशेष कार्यक्रम में बधाई दी।
गृह मंत्री ने कहा, "यह एक मिथक है कि महिलाएं कुछ खास काम नहीं कर सकतीं।"
उन्होंने कहा कि महिलाओं की शारीरिक संरचना पुरुषों से भिन्न होती है इसलिए एक औसत महिला की तुलना में एक औसत पुरुष मजबूत होता है। "लेकिन उनमें कुछ और गुण होते हैं जैसे अनुकूलनशीलता, समय अनुसार लचीलापन और बेहतर निर्णय।" उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों में महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह बरसों से समाया हुआ है।
उन्होंने कहा, "यह पूर्वाग्रह खत्म होना चाहिए और महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्हें सभी तरह के सुरक्षा कामों और सुरक्षा बलों के सभी पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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