भोपाल गैस समझौते के 'दलाल' का खुलासा हो : सुषमा
सुषमा ने शनिवार को भोपाल में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल में विदेश मंत्रालय के विधि सलाहकार रहे सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बी. सेन ने अपनी आत्मकथा 'सिक्स डिकेड्स ऑफ लॉ, पॉलिटिक्स एण्ड डिप्लोमेसी' में लिखा है कि 1989 में यूनियन कार्बाइड और भारत सरकार के बीच हुए समझौते में एक दलाल की महत्वपूर्ण भूमिका थी। यही कारण है कि हजारों लोगों की जान लेने वाले भोपाल हादसे में मात्र 470 मिलियन डालर में समझौता हो गया।
सुषमा ने सेन की किताब के कुछ पन्नों की छाया प्रतियां पत्रकारों को देते हुए बताया, "सेन ने आत्मकथा में लिखा है कि समझौते के कुछ माह बाद वह (सेन) वाशिंगटन गए, जहां उनकी मुलाकात यूनियन कार्बाइड के एक वकील से हुई। मैंने उसे जब समझौते पर बधाई दी, तो वह मुस्कुराया और बोला कि शुक्र है कि एक अच्छा दलाल (फिक्सर) हमें मिल गया था।"
सेन ने लिखा है कि यूनियन कार्बाइड नहीं चाहता था कि हादसे का प्रकरण न्यूयार्क के न्यायालय में चले क्योंकि ऐसा होने पर उसे बहुत ज्यादा मुआवजा देना पड़ता।
सुषमा ने कहा है कि देश उस दलाल का नाम जानना चाहता है और उनकी मांग है कि केंद्र सरकार अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर इस बात की जांच कराए कि वह दलाल कौन है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार से भी उन्होंने अनुरोध किया है कि भोपाल गैस हादसे के कारणों को जानने के लिए बनाए गए एक सदस्यीय आयोग की कार्य सूची में भी इस मुद्दे को शामिल किया जाए।
उन्होंने गैस पीडितों की लड़ाई लड़ने वाले स्वयंसेवी संगठनों और पत्रकारों से अपील की कि वे भी उस दलाल का पता लगाने की कोशिश करें, जिसने समझौते में अहम भूमिका निभाई थी, क्योंकि लेखक व दलाल अब भी जिंदा है।
स्वराज से आत्मकथा में भोपाल गैस हादसे की तारीख के सही दर्ज न होने की प्रमाणिकता पर जब सवाल किया गया तो उनका जवाब था कि इन छोटी त्रुटियों की ओर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि जिस मुद्दे को उन्होंने उठाया है उसका खुलासा आवश्यक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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