राष्ट्रमंडल खेलों के स्वरूप में बड़ा बदलाव लाएगी दिल्ली : विशेषज्ञ

सिडनी, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के दौरान जो बाधाएं थीं वे खेलों के स्वरूप में बड़े बदलाव के लिए एक उत्प्रेरक का कार्य करेंगी। आस्ट्रेलियाई खेल विशेषज्ञों ने यह राय जाहिर की है।

आस्ट्रेलियाई समाचार पत्र 'द आस्ट्रेलियन सेटरडे' में क्रेग मैकलेचे ने लिखा है कि यह काफी महत्वपूर्ण रहा कि राष्ट्रमंडल खेल एक बड़ी प्रतियोगिता के रूप में उभरकर सामने आया है।

दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में एक तरफ जहां संगठनात्मक स्तर पर काफी कमियां दिखाई दी वहीं दूसरी तरफ खेल आयोजन स्थलों पर लोगों की उपस्थिति कम रही। सुरक्षा को लेकर कई तरह की आशंकाएं पैदा हुई जिससे कई खिलाड़ियों ने अपने नाम वापस ले लिए।

राष्ट्रमंडल खेल संघ (सीजीएफ) और अगली बार इस खेल की मेजबानी करने वाले देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन बड़े खिलाड़ियों को वापस लाने की है जिन्होंने दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से अपना नाम वापस ले लिया था।

मैकलेचे कहते हैं, "जब दिल्ली में खेल बहुत अच्छे तरीके से सफल होते, जैसा की चार साल पहले मेलबर्न में हुआ था, तो सारी समस्याएं विस्मृत हो जाती हैं। सीजीएफ और ग्लासगो के लिए सबसे बड़ी चुनौती खलों को फिर से परिभाषित करने की है।"

मैकलेचे ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के स्वरूप में सुधार की आवश्यकता है।

उनका मानना है कि दिल्ली में खेलों के आयोजन में आई दिक्कतों से यह साबित होता है कि राष्ट्रमंडल खेलों के भविष्य को देखते हुए सीजीएफ को इसकी प्रक्रिया में सुधार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, "खेलों की असफलता और सफलता को लेकर आयोजन समिति की अपेक्षा सरकार ने मुख्य भूमिका निभाई। इसलिए सीजीएफ के लिए आयोजन समिति के साथ काम करना ही पार्याप्त नहीं है। इसके लिए सभी हितधारकों के साथ बेहतर संबंध विकसित किये जाने चाहिएं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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