नहीं होने चाहिए थे राष्ट्रमंडल खेल : अय्यर
'सीएनएन-आईबीएन' चैनल को दिए साक्षात्कार में अय्यर ने वैसे यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रमंडल खेलों की उनकी आलोचना का भारतीय खिलाड़ियों से कोई वास्ता नहीं है।
उन्होंने कहा, "मेरी आलोचना का सम्बंध बुनियादी नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के गौरव से था। मैंने तब भी सवाल उठाया था और मैं अब भी पूछता हूं कि यदि महात्मा गांधी जीवित होते, तो क्या वे इस खेल आयोजन के उद्घाटन के लिए दीप प्रज्जवलित करने को राजी होते। इसका उत्तर है नहीं!"
उन्होंने कहा, "हम ऐसे मुल्क में रहते हैं कि जहां के 47 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, क्योंकि 10 में से नौ गर्भवती महिलाएं रक्ताल्पता से पीड़ित हैं। हम सबसे ज्यादा शिशु मृत्यु दर वाले देशों में से हैं।"
उन्होंने कहा कि इन खेलों में खर्च वार्षिक ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के खर्च के वार्षिक बजट से चार गुणा ऊपर चला गया।
उन्होंने कहा, "क्या हमें अपने संसाधन इस तरह इस्तेमाल करने चाहिए? दूसरा, यदि हमारे पास ऐसे संसाधन हैं तो हम उन्हें लगाकर अपने बच्चों को खेल सुविधाएं क्यों नहीं उपलब्ध करा रहे हैं।"
अय्यर ने कहा कि 95 प्रतिशत भारतीय बच्चों को किसी तरह का खेल प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि देश को खिलाड़ियों का देश बनाने की जगह हम उसे खेल आयोजकों का देश बना रहे हैं।
उन्होंने दोहराया कि वह खेलों या खिलाड़ियों के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मेरा विरोध कभी भी भारतीय खिलाड़ियों के प्रति नहीं रहा..इस खेल में उन्होंने पदक इसलिए नहीं जीते कि घरेलू टीम होने के नाते उन्हें किसी किस्म की विशेष सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं।"
अय्यन ने कहा, "हमारे खेल अधिकारियों और आयोजन समिति से सम्बद्ध अन्य अधिकारियों की अकर्मण्यता के बावजूद ..वे जीते।"
अय्यर ने कहा कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का केंद्र बनी खेलों की बेकार तैयारियों के सम्बंध में किसी एक व्यक्ति विशेष की आलोचना नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वायदा किया था कि हर बात, हर चूक की मुकम्मल जांच होगी और दोषी को दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा, "अब ख्ेाल सम्पन्न हो चुके हैं और ..वह जांच अब शुरू हो जानी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications