रुपये में स्थिरता के लिए विदेशी पूंजी प्रवाह रोके आरबीआई: इंफोसिस
इंफोसिस के मुख्य वित्तीय अधिकारी वी. बालाकृष्णन ने पत्रकारों से कहा, "विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बिना किसी ठोस आधार के हो रहे भारी पूंजी प्रवाह को रोकने के लिए आरबीआई को हस्तक्षेप करना चाहिए। रुपया 10-15 प्रतिशत मजबूत हो चुका है।"
उन्होंने कहा कि भारी मात्रा में बिना किसी ठोस आधार के देश में हो रहे पूंजी प्रवाह से निर्यात क्षेत्र खासकर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। पिछले छह महीनों में देश में एफआईआई ने 22 अरब डॉलर का निवेश किया है।
बालाकृष्णन ने कहा, "व्यापार घाटा 13 अरब डॉलर का हो गया है। मुद्रा के मूल्य में तेज उतार-चढ़ाव देश और साफ्टवेयर सेवा उद्योग के हित में नहीं है जो कि निर्यात पर आधारित है। हमें उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक (आरबीआई) पूंजी प्रवाह की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा।"
पिछले 18 महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 46 से 39 और 39 से 52 रुपये के बीच बड़े दायरे में घूमा है। फिलहाल यह 44.50 रुपये के स्तर पर है। उन्होंने कहा कि रुपये की कीमत में बदलाव से कम्पनी के तिमाही और वार्षिक आधार पर मुनाफे पर असर पड़ता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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