ओबामा के साथ उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात व आउटसोर्सिग पर होगी चर्चा (लीड-1)

भारत ने ओबामा के दौरे से पूर्व असैन्य परमाणु विधेयक के कुछ पहलुओं को लेकर अमेरिकी चिंताओं को भी दूर कर दिया है।

मनमोहन सिंह और ओबामा के बीच चार दिवसीय दौरे के दौरान वैश्विक मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं में चीन के बारे में भी चर्चा होगी।

सूत्रों ने कहा कि ओबामा अपने पहले भारत दौरे की शुरुआत मुम्बई से करेंगे और 26/11 के पीड़ितों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने के लिए ताज महल होटल में रुकेंगे। ओबामा मुम्बई में उन विभिन्न स्थलों का दौरा करेंगे, जिन्हें लगभग दो वर्ष पहले 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने निशाना बनाया था।

विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने यहां संवाददाताओं को बताया, "अमेरिका द्वारा आउटसोर्सिग को लेकर की गई सख्ती और वीजा नियमों को सख्त बनाए जाने को लेकर देश की सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने कुछ गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं। इन मुद्दों पर राष्ट्रपति ओबामा के दौरे के समय चर्चा की जाएगी।"

कृष्णा उस प्रश्न का जवाब दे रहे थे, जिसमें उनसे पूछा गया कि ओबामा के दौरे के दौरान किन क्षेत्रों में सकारात्मक सुधार की उम्मीद की जा रही है। ओबामा का चार दिवसीय भारत दौरा संभवत: पांच नवम्बर से आरंभ होगा।

विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच आपसी समझ इतनी मजबूत है कि कुछ मुद्दों की वजह से दोनों के रिश्ते प्रभावित नहीं हो सकते।

ओबामा आउटसोर्सिग के मुद्दे के प्रति भारत की संवेदनशीलता के मद्देनजर अपने चार दिवसीय दौरे के दौरान बेंगलुरू नहीं जाएंगे।

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिकी सरकार ने एच-1बी और एल1 वीजा के शुल्क में बढ़ोतरी की थी। यह वृद्धि आउटसोर्सिग से जुड़ी कम्पनियों को लेकर विशेष तौर पर की गई थी। इससे भारतीय आईटी उद्योग को प्रति वर्ष 20 करोड़ डालर का नुकसान हो सकता है। ओहियो प्रांत ने अगस्त महीने में आउटसोर्सिग पर पाबंदी तक लगा दी थी।

ओबामा के दौरे के पूर्व भारत ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि असैन्य परमाणु कानून का मकसद नई दिल्ली के साथ परमाणु व्यापार के लिए एक समतल मैदान उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही भारत ने निर्यात प्रतिबंधों को हटाए जाने पर रचनात्मक चर्चा की उम्मीद जाहिर की है।

कृष्णा से जब यह पूछा गया कि क्या भारत, अमेरिका से उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात की उम्मीद करता है, उन्होंने कहा कि निर्यात प्रतिबंधों पर रचनात्मक बातचीत हो सकती है।

कृष्णा ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच परमाणु करार सबसे बड़ी बात है और उसके इर्द-गिर्द कई सारे मुद्दे उमड़ रहे हैं।"

कृष्णा ने कहा, "जब परमाणु दायित्व विधेयक पारित हुआ तो उसे लेकर कुछ गलतफहमी थी। मैंने इस बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ फोन पर बात की थी और उसके बाद न्यूयार्क में भी बात की।"

कृष्णा ने कहा, "यह पूरा प्रकरण उन लोगों को एक समतल मैदान उपलब्ध कराने को लेकर था, जो भारत के साथ परमाणु कारोबार करना चाहते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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