वोडाफोन ने कर विभाग के खिलाफ याचिका दायर की
वोडाफोन ने हचिसन एस्सार की विदेशी सहयोगी कम्पनी हचिसन वाम्पोआ की 67 प्रतिशत हिस्सेदारी 11 अरब डॉलर में खरीदी थी। इसके बाद कर विभाग ने ब्रिटेन की कम्पनी वोडाफोन पर 2.6 अरब डॉलर की कर देनदारी का दावा किया था।
कर अधिकारियों का कहना है कि वोडाफोन का यह सौदा पूंजीगत लाभ के कारण कर दायरे में आता है क्योंकि विक्रेता कम्पनी की परिसंपत्तियां भारत में हैं।
कम्पनी ने अपने बयान में कहा, "विभाग ने अब वोडाफोन को विक्रेता का एजेंट बताने की नई प्रक्रिया शुरू की है।"
उन्होंने कहा कि वोडाफोन ने मुख्य तौर पर अधिकार क्षेत्र का मुद्दा उठाया है। सवाल यह है कि क्या दो अप्रवासियों द्वारा विदेशी कम्पनी के शेयर हस्तांतरण पर भारतीय कर विभाग कर ले सकता है। इस सम्बंध में सर्वोच्च न्यायालय में मामला लंबित है। इसलिए वोडाफोन को हचिसन का एजेंट बताया जाना गलत है।
बम्बई उच्च न्यायालय ने विभाग के दावे को सही बताया था तब वोडाफोन ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 सितम्बर को अपने फैसले में वोडाफोन को कोई राहत नहीं दी थी और कर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर वोडाफोन के दायित्व की सीमा निर्धारित करने को कहा था।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एच. एस. कपाड़िया की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि यदि कम्पनी उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक चाहती है तो वह दायित्वों के एक हिस्से का भुगतान करे।
वोडाफोन का अभी भी कहना है कि यह हस्तांतरण भारत में कर दायरे के अंतर्गत नहीं आता क्योंकि उसने कम्पनी का अधिग्रहण किया है और कोई पूंजीगत लाभ प्राप्त नहीं किया है।
वोडाफोन समूह के प्रवक्ता ने कहा, "वोडाफोन का यही मानना है कि इस हस्तांतरण में उसकी कोई कर देनदारी नहीं है और हम इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में दोबारा समीक्षा चाहते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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