राजग से लोगों का मोहभंग, कांग्रेस का जनाधार ही नहीं : रामकृपाल (साक्षात्कार)
पटना, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के महासचिव एवं सांसद रामकृपाल यादव ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के साथ उनकी पार्टी का सत्ता में आना तय है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार से लोगों का मोहभंग हो गया है।
उनके मुताबिक कांग्रेस का तो राज्य में जनाधार ही नहीं है और राज्य सरकार विकास के जो दावे कर रही है वे सिर्फ विज्ञापनों तक ही सिमटे हुए हैं। रामकृपाल राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के सबसे करीबी और विश्वासपात्र पार्टी नेताओं में हैं। यही वजह थी कि पटना से लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद लालू ने राज्यसभा के जरिए उन्हें फिर संसद पहुंचाया। संसद में भी वह पार्टी का पक्ष रखने में सबसे आगे रहते हैं।
रामकृपाल ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में कहा कि वर्तमान सरकार सिर्फ विकास का ढोंग कर रही है। विकास का उसका दावा सिर्फ विज्ञापनों में ही दिखता है जबकि जमीनी हकीकत कुछ अलग ही कहानी बयां करती है। सरकार अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन निकालकर जनता को भ्रम में डाले हुए है।
उन्होंने कहा, "राज्य में बिजली की स्थिति दयनीय है, कल तक जहां खेतों में हरियाली दिखाई देती थी वहां अब सूखे के दर्शन होते हैं। आज जो भी विकास दिखाई दे रहा है वह केंद्र के पैसों से हुआ है। राज्य सरकार तो भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी हुई है और जनता को इस बारे में बताना हमारा सबसे बड़ा मुद्दा है। राजग सरकार से लोगों का मोहभंग हो गया है।"
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट देने के बारे में पूछे जाने पर वह कहते हैं, "इस मामले में भाजपा सबसे आगे है। राजद को केवल बदनाम किया जाता है।" उन्होंने स्वयंसेवी संगठनों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे पता चल जाता है कि भाजपा इसमें काफी आगे है।
टिकट को लेकर सभी दलों में बरपे हंगामे के विषय में पूछने पर उन्होंने कहा कि राजद में सबसे कम हंगामा हुआ है। उन्होंने कहा कि लोगों को राजनीति में महत्वकांक्षा बढ़ गई है। इस कारण टिकट को लेकर अफरा-तफरी मची है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वहां तो अब भी हंगामा चल रहा है।
रामकृपाल कांग्रेस पर भी निशाना साधने का कोई मौका नहीं चूकते। वह कहते हैं राज्य में तो कांग्रेस का कोई जनाधार ही नहीं है। भले ही कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और अध्यक्ष सोनिया गांधी यहां जितना मर्जी प्रचार-प्रसार करें, मतदाताओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।
उन्होंने कहा कि चुनावों में कांग्रेस के साथ समझौता करने का मुख्य कारण धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले दलों को सत्ता से अलग रखना था, लेकिन कांग्रेस को यह पसंद नहीं आया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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