बच्चों में व्यवहारगत परेशानियां लाता है परिवार का बिखराव
समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने एक से सात वर्ष की आयु के करीब 13,500 बच्चों पर यह अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जो बच्चे एकल अभिभावक या सौतेले अभिभावकों के साथ रह रहे हैं उनमें भावनात्मक, व्यवहारगत परेशानियां होने का खतरा दोगुना होता है। ऐसे बच्चों में अतिसक्रियता की भी परेशानी होती है।
सरकारी अनुदान से सम्पन्न हुए इस अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक सौतेले माता-पिता के साथ रहने वाले 15 प्रतिशत और एकल अभिभावक वाले परिवार में रहने वाले 12 प्रतिशत बच्चों में गम्भीर व्यवहारगत परेशानियां देखी गईं। अपने माता-पिता दोनों के साथ रहने वाले केवल छह प्रतिशत बच्चों को ही इन परेशानियों का सामना करना पड़ा।
लंदन के 'इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन' के 'मिलेनियम कोहॉर्ट' अध्ययन की सह-लेखिका लीसा कैडरवुड कहती हैं कि अपने जन्मदाता पिता से अलग रहने वाले बच्चों में गरीबी के और अन्य नकारात्मक विचार आते हैं।
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि कामकाजी या उच्च शिक्षा प्राप्त अभिभावकों के साथ रहने वाले बच्चों में व्यवहारगत परेशानियां नहीं आती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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