परमाणु दायित्व विधेयक पर अमेरिका की चिंताएं दूर: कृष्णा
कृष्णा ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, "परमाणु दायित्व विधेयक लेकर कुछ गलतफहमियां थीं। मैनें अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से फोन पर और न्यूयार्क में इस बारे में बातचीत की।"
कृष्णा ने कहा कि उन्होंने क्लिंटन को आश्वासन दिया है कि इस कानून को अमेरिका सहित किसी देश को ध्यान में रखकर पारित नहीं कराया गया है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ओबामा की बातचीत में परमाणु दायित्व कानून से संबंधित मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है।
वाशिंगटन में इस कानून के आपूर्तिकर्ताओं पर देनदारी तय करने से संबंधित प्रावधानों को लेकर निराशा के माहौल के बीच कृष्णा ने यह बात कही।
कृष्णा ने कहा कि भारत 'कन्वेंशन ऑन सप्लीमेंटरी कम्पनसेशन' (सीएससी) पर अपनी भूमिका को लेकर संदेह दूर करेगा और स्पष्ट करेगा कि परमाणु दायित्व कानून सीएससी से विरोधाभासी नहीं है। सीएससी परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दुर्घटना की स्थिति में अतिरिक्त मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किया गया वैश्विक तंत्र है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मौजूद विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, "सीएससी में शामिल होने को लेकर भारत का स्पष्ट और सकारात्मक रुख है।"
अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2008 में भारत-अमेरिकी परमाणु समझौते की भूमिका तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाली कुछ अमेरिकी परमाणु कम्पनियों ने चेतावनी दी है कि यदि भारत सीएससी का सदस्य नहीं बनेगा तो वह भारत के साथ व्यापार नहीं करेंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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