कलाम और देवबंद की मध्यस्थता चाहता है निर्मोही अखाड़ा
अखाड़ा से सम्बद्ध रामदास ने बुधवार को अयोध्या में कहा, "अब अयोध्या में शांति और सौहार्द्र की मशाल जल चुकी है, इसलिए हम चाहते हैं कि हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के आध्यात्मिक गुरु आगे आएं और अदालत के बाहर मामले के अंतिम समाधान के लिए ठोस प्रयास करें, ताकि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में फिर से न शुरू होने पाए।"
रामदास, अखाड़ा के मुख्य महंत भास्कर दास (89) के सचिव हैं। अखाड़ा ने मुस्लिम समुदाय की ओर से हासिम अंसारी द्वारा मामले के अंतिम समाधान के लिए शुरू की गई बातचीत में काफी रुचि दिखाई है।
रामदास ने कहा, "इन प्रमुख लोगों का कर्तव्य है कि वे विवाद के हल के लिए प्रयास करें। ये सभी अपने आप में ऐसी संस्था हैं, जिनकी बातें तमाम सारे लोग मानते हैं, इसलिए उनकी बातें मायने रखती हैं।"
रामदास ने कहा, "मेरी स्पष्ट राय है कि जब ये सारे लोग खुले दिमाग से एक साथ बैठेंगे, तो ये सफलतापूर्वक रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे को न केवल शांतिपूर्ण समझौते के तहत अंतिम परिणति प्रदान करेंगे, बल्कि ये लोग भारत की साम्प्रदायिक राजनीति के अंत का भी मार्ग प्रशस्त करेंगे।"
लेकिन रामदास ने समझौते के फार्मूले का कोई विवरण देने से इंकार कर दिया। समझा जाता है कि निर्मोही अखाड़ा ने अंसारी और अयोध्या के अन्य स्थानीय मुसलमानों के साथ राय मशविरा कर कोई फार्मूला तैयार किया है।
ज्ञात हो कि 90 वर्षीय अंसारी ने सुलह का हाथ बढ़ाया और ज्ञान दास के आवास पर चल कर गए। ज्ञान दास न केवल अयोध्या के प्रमुख हनुमान गढ़ी मंदिर के प्रमुख हैं, बल्कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष भी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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