कश्मीर पर वार्ताकार नियुक्त, गिलानी ने निर्थक प्रयास बताया (राउंडअप)
केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने पत्रकारों से कहा, "हमने वार्ताकारों का एक समूह गठित किया है, इस समूह के तीनों वार्ताकारों की विश्वसनीयता से हम अवगत हैं।" गृहमंत्री ने कहा कि अभी एक और व्यक्ति को वार्ताकार नियुक्त किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि वार्ताकार जम्मू एवं कश्मीर के सभी वर्गो के लोगों खासकर युवाओं और छात्रों के साथ स्थाई व निर्बाध बातचीत करेंगे।
चिदम्बरम ने कहा, "केंद्र सरकार की ओर से उठाया गया यह कदम राज्य की समस्याएं दूर करने के मुद्दे पर सरकार की गंभीरता का परिचायक है।"
इस बीच अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने बुधवार को बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वार्ताकारों की नियुक्ति को निर्थक कदम बताया है।
यद्यपि, हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारुख और जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासीन मलिक ने कहा कि वह हां या ना कहने से पहले विभिन्न विकल्पों पर विचार करेंगे।
हर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता गिलानी ने पत्रकारों से कहा, "यह एक निर्थक कोशिश है। कश्मीर के हालात पर भारत सरकार गूंगे और बहरे की तरह व्यवहार कर रही हैं।"
प्रदेश के पाकिस्तान में विलय के समर्थक गिलानी ने कहा कि नई दिल्ली के साथ कोई भी बातचीत तभी संभव है जब केंद्र सरकार कश्मीर को 'अंतर्राष्ट्रीय विवाद' मानने के साथ पांच सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करे।
उन्होंने कहा, "हमने एक पांच सूत्रीय फार्मूला दिया है।"
मीरवाइज ने कहा कि उनके नेतृत्व वाले समूह की बैठक गुरुवार को बुलाई गई है जिसमें सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया का फैसला किया जाएगा।
उन्होंने कहा, "हम गुरुवार को बैठक के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया देंगे।"
स्वतंत्र जम्मू एवं कश्मीर राज्य की मांग का समर्थन करने वाले यासीन मलिक ने कहा कि हम किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विकल्पों पर विचार करेंगे।
वार्ताकार नियुक्त करने का फैसला पिछले महीने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल समूह की बैठक में लिया गया था।
अलगाववादी नेताओं का नाम लिए बिना चिदम्बरम ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के राजनेताओं से वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा। उन्होंने कहा, "मैं जम्मू एवं कश्मीर के सभी वर्गो के लोगों से अपील करता हूं कि वह अपने विचार वार्ताकारों के सामने रखें और इससे हम इस समस्या का समाधान निकालने में सक्षम होंगे।"
एक अन्य वार्ताकार के सम्बंध में पूछे जाने पर चिदम्बरम ने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र के एक अन्य वार्ताकार की नियुक्ति की जाएगी।
इससे पहले पिछले साल दिसम्बर में अलगाववादियों से बातचीत की सरकार की कोशिश नाकाम हो गई थी। आतंकवादियों द्वारा हुर्रियत नेता फैजल कुरैशी को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर देने के बात यह बातचीत टूट गई थी।
कुरैशी हुर्रियत के मीरवाइज उमर फारुख के नेतृत्व वाले धड़े के वरिष्ठ नेता हैं। वह सरकार से बातचीत के लिए सहमत हुए थे।
नए वार्ताकारों में से दो पहले भी कश्मीर में शांति प्रकिया से जुड़े रहे हैं। पडगांवकर वकील और भारतीय जनता पार्टी नेता राम जेठमलानी के नेतृत्व वाली कश्मीर समिति के सदस्य रह चुके हैं।
जामिया मिलिया इस्लामिया के नेल्सन मंडेला
शांति संस्थान की प्रमुख राधा कुमार भी हुर्रियत के उदारवादी धड़े के प्रमुख मीरवाइज उमर फारुख और सैयद अली गिलानी से बातचीत की प्रक्रिया में लगातार जुड़ी रही हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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