बरेली में शिक्षिकाओं ने ड्रेस कोड का विरोध किया

करीब 100 साल पुराने बरेली कॉलेज के प्रशासन ने विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों को सर्कुलर भेजकर सुझ्झाव दिया है कि कॉलेज में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए शिक्षिकाएं साड़ी पहनकर आएं।

पत्रकारिता विभाग की शिक्षिका वंदना शर्मा ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा यह पूरी तरह से तर्कहीन बात है और शिक्षिकाओं पर ड्रेस कोड लागू करके परिसर में शैक्षणिक माहौल बेहतर नहीं बनाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि हर शिक्षक मेरी इस बात पर पर सहमत होगा कि कॉलेज में शैक्षणिक माहौल बेहतर बनाने के लिए शिक्षण पद्धति व अन्य पहलुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए न कि शिक्षकों के पहनावे पर।

शर्मा की बात का समर्थन करते हुए अंग्रेजी विभाग की शिक्षिका पूर्णिमा अनिल ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि महिला शिक्षकों के सलवार सूट और जींस छोड़कर साड़ी पहनकर आने से शैक्षणिक विकास में सकारात्मक परिवर्तन आ जाएगा। उन्होंने कहा कि वे सभी इसका विरोध करेंगी।

उन्होंने कहा कि अगर महिला शिक्षकों पर ड्रेस कोड लागू करके उन्हें साड़ी पहनकर कॉलेज आने की बात कही जा रही है तो पुरुष शिक्षकों पर ड्रेस कोड लागू करके उन्हें धोती-कुर्ता पहनकर कॉलेज आने के लिए क्यों नहीं कहा जाता।

इस बारे में कॉलेज के प्राचार्य आर.पी. सिंह से आईएएनएस ने सम्पर्क किया तो उन्होंने कहा कि कॉलेज में अभी ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया है। सिंह ने बताया कि उन्होंने शिक्षिकाओं खासकर जो तदर्थ आधार पर कॉलेज में पढ़ा रही हैं उनके लिए सर्कुलर भेजकर साड़ी पहनकर आने का सुझाव दिया गया है।

सिंह यह नहीं बता सके कि ड्रेस कोड लागू होने से कॉलेज का शैक्षणकि माहौल बेहतर कैसे होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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