कश्मीर में दोबारा बातचीत निर्थक : गिलानी
यद्यपि, हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारुख और जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासीन मलिक ने कहा कि वह हां या ना कहने से पहले विभिन्न विकल्पों पर विचार करेंगे।
हर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता गिलानी ने पत्रकारों से कहा, "यह एक निर्थक कोशिश है। कश्मीर के हालात पर भारत सरकार गूंगे और बहरे की तरह व्यवहार कर रही हैं।"
इससे पहले बुधवार को सरकार ने पत्रकार दिलीप पडगांवकर, सूचना आयुक्त एम. एम. अंसारी और शिक्षाविद राधा कुमार को जम्मू एवं कश्मीर में बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए वार्ताकार नियुक्त किया।
प्रदेश के पाकिस्तान में विलय के समर्थक गिलानी ने कहा कि नई दिल्ली के साथ कोई भी बातचीत तभी संभव है जब केंद्र सरकार कश्मीर को 'अंतर्राष्ट्रीय विवाद' मानने के साथ पांच सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करे।
उन्होंने कहा, "हमने एक पांच सूत्रीय फार्मूला दिया है।"
मीरवाइज ने कहा कि उनके नेतृत्व वाले समूह की बैठक गुरुवार को बुलाई गई है जिसमें सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया का फैसला किया जाएगा।
उन्होंने कहा, "हम गुरुवार को बैठक के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया देंगे।"
स्वतंत्र जम्मू एवं कश्मीर राज्य की मांग का समर्थन करने वाले यासीन मलिक ने कहा कि हम किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विकल्पों पर विचार करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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