कांग्रेस व जेडी (एस) ने दी विश्वास मत के बहिष्कार की धमकी

कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने यहां संवाददाताओं को बताया, "हम विश्वास मत के लिए आयोजित होने वाले सत्र का बहिष्कार करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि यह न केवल अभूतपूर्व है, बल्कि राज्यपाल द्वारा दोबारा विश्वास मत के लिए कहना असंवैधानिक भी है। अयोग्य ठहराए गए 16 विधायकों का मामला अभी उच्च न्यायालय में लम्बित है।"

कांग्रेस के पास 225 सदस्यीय विधानसभा में 73 विधायक हैं। कांग्रेस ने गुरुवार के लिए रणनीति तय करने हेतु बुधवार को अपने विधायक दल की बैठक बुलाई है।

सिद्धारमैया ने कहा, "पार्टी में यह राय है कि राज्यपाल को तब तक के लिए विश्वास मत सत्र स्थगित कर देना चाहिए, जब तक कि अयोग्य ठहराए गए विधायकों की संयुक्त रिट याचिका पर फैसला नहीं आ जाता।"

उन्होंने कहा, "यदि राज्यपाल सत्र स्थगित नहीं करते हैं तो हमारे पास इस तरह की असंवैधानिक कार्यवाही से दूर रहने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं होगा।"

इस मामले में कांग्रेस की नाराजगी में खुद को शामिल करते हुए जेडी (एस) की राज्य इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी.कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक भी विश्वास मत में हिस्सा नहीं लेंगे।

कुमारस्वामी ने संवाददाताओं को बताया, "राज्यपाल पहले ही सोमवार को ध्वनि मत से हासिल किए गए विश्वास मत को मजाक बता चुके हैं और राज्य में संवैधानिक संकट का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा कर चुके हैं, क्योंकि विश्वास मत की कार्यवाही भारी हंगामे और भ्रम के बीच नियमों के खिलाफ आयोजित की गई।"

नाराज कुमारस्वामी ने सवाल किया, "राज्यपाल भला मुख्यमंत्री से दोबारा शक्ति परीक्षण के लिए कैसे कह सकते हैं?"

इस बीच सत्ताधारी भाजपा ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने के लिए अपने 105 विधायकों को तीन पंक्तियों का व्हिप जारी किया है। यही नहीं भाजपा ने खरीद-फरोख्त से बचने के लिए अपने सभी विधायकों को शहर के बाहरी हिस्से में स्थित गोल्डन पाम रेसोर्ट में बंद कर रखा है।

16 विद्रोही विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के बाद 225 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की संख्या घट कर 208 हो गई है। ऐसे में बहुमत के लिए जरूरी विधायकों की संख्या 105 पर आ गई है।

चूंकि उच्च न्यायालय ने विद्रोही विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने पर स्थगन आदेश देने से इंकार कर दिया है, लिहाजा विपक्ष की कुल ताकत 102 सदस्यों की है। इसमें 73 कांग्रेस के, 28 जेडी (एस) के और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं।

ज्ञात हो कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति के.एस.खेहर और न्यायमूर्ति एन.कुमार की एक खण्डपीठ ने मंगलवार को 11 भाजपा विधायकों के मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया और निर्दलीय विधायकों के मामले की सुनवाई के लिए 18 अक्टूबर की तारीख तय कर दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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