नागरिकों के मारे जाने पर सदमे में ग्रामीण
नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में राज्य पुलिस ने आठ नक्सलियों को मार गिराने का दावा करने के साथ इसे एक उपलब्धि बताया था लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि मारे गए नक्सलियों में से दो नागरिक थे। ग्रामीणों के इस आरोप से पुलिस का दावा विवाद से घिर गया है।
हिमाद्री ने आईएएनएस को बताया, "अचानक यहां गोलाबारी होने लगी। गांव के सभी लोग इधर-उधर भागने लगे। मेरा नौकर भागते हुए रसोईघर में पहुंचा। उसके पीछे पुलिसकर्मी भी आए। इससे पहले कि मेरे पति कुछ समझ पाते, पुलिस ने दोनों पर गोली चला दी और वे मारे गए।"
हिमाद्री अपने पति गौतम पटेल (40) और नौकर दाऊ के मारे जाने पर लेंदगिडिपा के अन्य ग्रामीणों की तरह सदमे में हैं। लेंदगिडिपा राज्य की राजधानी रायपुर से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
किसान रोशट पटेल (32) ने बताया, "हमने हमेशा पुलिस का सहयोग किया है। हम कभी नक्सलियों के सम्पर्क में नहीं थे। हमने सोचा था कि पुलिस नक्सलियों को यहां अपना आधार नहीं बनाने देगी लेकिन पुलिस ने जो किया है, उससे हम हतप्रभ हैं।"
उधर, छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक विश्व रंजन ने आईएएनएस को बताया, "हां, गत नौ अक्टूबर को दोनों तरफ से हुई गोलाबारी में दो नागरिक मारे गए थे। लेकिन उनकी हत्या कैसे हुई, इसका हम पता लगाएंगे।"
रंजन ने कहा कि यह जांच से ही पता चलेगा कि नागरिकों की हत्या नक्सलियों द्वारा हुई या वे पुलिस की गोली से मारे गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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