येदियुरप्पा 14 अक्टूबर को दोबारा बहुमत साबित करेंगे (लीड-3)
राज्यपाल के पत्र के जवाब में मुख्यमंत्री के सचिव आई.एस.एन. प्रसाद ने मंगलवार को लिखा, "मुख्यमंत्री 14 अक्टूबर को सदन में बहुमत साबित करने के लिए तैयार हैं।"
इससे पहले राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की अनुशंसा करने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, "यदि आप दोबारा विश्वास मत पेश करना चाहते हैं, तो मैं आपको सदन में 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक बहुमत साबित करने का एक और मौका देता हूं।"
भारद्वाज ने कहा है कि विश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने वाले और विरोध करने वाले विधायकों की संख्या दर्ज नहीं की गई। फैसला ध्वनि मत से किया गया और पूरी कार्यवाही वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में तमाशा बन गई और सदन में भारी हंगामा हुआ।
पत्र में कहा गया है, "विधानसभा की सोमवार की कार्यवाही का बारीकी से निरीक्षण करने पर पता चलता है कि आपने सदन पटल पर बहुमत साबित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। इस परिस्थिति में आपका कर्तव्य बनता है कि विधानसभा में स्पष्ट एवं निष्पक्ष रूप से यह दिखाएं कि सदन में आपके पास बहुमत है।"
राज्यपाल ने कहा है, "सोमवार को जब 10.05 और 10.10 बजे के बीच कार्यवाही चली तो उस समय सदन व्यवस्थित नहीं था। ऐसे बाहरी लोग भी सदन में मौजूद थे, जिन्हें वहां होने का अधिकार नहीं है। इस बात की भी शिकायतें थीं कि जो लोग विधानसभा सदस्य नहीं हैं वे भी ध्वनि मत में शामिल थे।"
राज्यपाल ने राजभवन में जल्दबाजी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "मुख्यमंत्री को मेरी यह सलाह मित्रवत है। यद्यपि चंद दिनों बाद दोबारा विश्वास मत अयोजित करना एक अभूतपूर्व घटना होगी, क्योंकि संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन यह नैतिकता और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी बनाए रखने का प्रश्न है।"
भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने एस.आर.बोम्मई बनाम केंद्र सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर येदियुरप्पा से सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा। राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विश्वास मत कराया जाना सदन में सरकार के लिए बहुमत साबित करने का सर्वोत्तम तरीका माना जाता है।
उधर, राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने बेंगलुरू में पत्रकारों से कहा कि वह उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी इस मामले में समर्थन मांगेगे जहां भाजपा की सरकारें नहीं हैं।
इधर, दिल्ली में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक हुई। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "कर्नाटक का संकट न तो संवैधानिक है और न ही राजनीतिक बल्कि यह राज्यपाल द्वारा खड़ा किया गया संकट है।"
उन्होंने कहा, "राज्यपाल ने राजभवन को राजनीतिक षडयंत्र का केंद्र बना दिया है। राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए राजभवन से ही जोड़-तोड़ के प्रयास किए गए। राज्यपाल का यह आचरण प्रदेश में यह स्थिति बनाने और इसे बढ़ावा देने में सबसे आगे रहा है।"
जेटली ने हाल के घटनाक्रमों से जुड़े राज्यपाल के पांच निर्देशों का जिक्र करते हुए कहा कि कर्नाटक के राज्यपाल अपनी राजनीतिक निष्पक्षता खो चुके हैं। उन्हें पद पर बनाए रखने का अब कोई औचित्य नहीं है। इसलिए केंद्र को उन्हें तत्काल वापस बुला लेना चाहिए।
बहरहाल, कर्नाटक उच्च न्यायालय की एक खण्डपीठ ने मंगलवार को भाजपा के 11 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। अदालत ने पांच निर्दलीयों के मामले में सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
पांच निर्दलीयों का मामला सोमवार के लिए इसलिए स्थगित कर दिया गया, क्योंकि उनकी संयुक्त रिट याचिका में एक तकनीकी गड़बड़ी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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