भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के लिए प्रतिबद्ध

इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा आयोजित फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) के रजत जयंती समारोह में चव्हाण ने कहा, "हम आयातित ईंधन और आयातित विशाल रिएक्टरों के जरिए अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का विस्तार करना चाहते हैं, लेकिन आपको बता दूं कि अपनी त्रिस्तरीय परमाणु कार्यक्रम के साथ, अपने अनुसंधान और अपनी प्रौद्योगिकी के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।"

चव्हाण ने कहा कि भारत का हमेशा यह रुख रहा है कि इस्तेमाल हुए ईंधन को रेडियोऐक्टिव कचरे के रूप में फेंका नहीं जाना चाहिए और इसलिए ईंधन का पुर्नसस्करण परमाणु ऊर्जा के स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण है।

चव्हाण ने कहा कि भारत अपने थोरियम भंडार के उपयोग पर निर्भर है।

चव्हाण ने कहा, "थोरियम उपयोग की एक चुनौतीपूर्ण प्रौद्योगिकी का सफल प्रदर्शन हमें आने वाले वर्षो में बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा के उपयोग के लिए जनता और नीति नियामकों का विश्वास जीतने में सक्षम बनाएगा।"

आईजीसीएआर के निदेशक बलदेव राज ने एफबीटीआर की स्थापना में किए गए परीक्षणों और मुश्किलों को याद करते हुए कहा कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्रौद्योगिकी पर लगभग 10,000 वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। इनमें से 2,500 आईजीसीएआर में हैं और अन्य विभिन्न अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों में हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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