बिहार में कानून व व्यवस्था बना चुनावी मुद्दा

पटना, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में सतारूढ़ जनता दल (युनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन राज्य में कानून एवं व्यवस्था में सुधार को मुद्दा बनाकर मतदाताओं से वोट मांग रहा है वहीं विपक्ष आंकड़ों का झूठा करार देते हुए

राज्य पुलिस मुख्यालय के आंकडों पर गौर करें तो एक समय फिरौती व अपहरण के लिए बदनाम बिहार में नीतीश सरकार के कार्यकाल में कुछ अपराधों में कमी आई है तो कुछ के मामले में कोई खास अंतर नहीं देखा गया है।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2001 में जहां फिरौती के लिए अपहरण की कुल 385 घटनाएं हुई वहीं 2002 में 396, 2003 में 335, और 2004 में 411 घटनाएं घटी। इसके बाद ऐसी घटनाओं में कमी देखी गई। वर्ष 2005 में फिरौती के लिए 251 लोगों का अपहरण हुआ तो वर्ष 2006 में 194, 2007 में 89 और उसके अगले वर्ष ऐसी घटनाओं की संख्या घटकर 66 तक पहुंच गई। हालांकि वर्ष 2009 में फिरौती के लिए अपहरण की घटनाएं बढ़कर 80 पहुंच गई और वर्ष 2010 के जुलाई तक 47 लोगों का फिरौती के लिए अपहरण किया गया।

इसी तरह दुष्कर्म के मामले में देखा जाये तो वर्ष 2001 से लेकर 2005 तक कुल 4,431 दुष्कर्म के मामले राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज किए गए जबकि 2006 से लेकर जुलाई 2010 तक 4,665 दुष्कर्म के मामले सामने आए हैं।

इधर, हत्या के मामलों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2001 में जहां हत्या के कुल 3,619 मामले दर्ज किये गये थे वहीं वर्ष 2002 में 3,634, 2003 में 3,652 तथा 2004 में 3,861 मामले विभिन्न थानों में दर्ज किए गए। इसी तरह वर्ष 2005 में हत्या के 3,423 मामले दर्ज किये गये जबकि वर्ष 2006 में 3,225, 2007 में 2,963, 2008 में 3,029, 2009 में 3,152 तथा 2010 में जुलाई तक हत्या के 1,995 मामले दर्ज किए गए।

सड़क डकैती के मामले पर गौर किया जाये तो पिछले वर्षो में ऐसी घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2001 से लेकर 2005 तक राज्य में जहां 1,267 सड़क डकैती की घटनाएं हुई थी वहीं जुलाई 2010 तक सिर्फ 8,38 सड़क डकैती की घटनायें विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं।

विपक्ष हालांकि इन आंकड़ों को गलत करार दे रहा है। राष्ट्रीय जनता दल के महासचिव रामकृपाल यादव कहते हैं कि कई घटनाओं के मामले थाने में दर्ज ही नहीं किए जाते। उनका अरोप है कि लोग पुलिस की डर से थाने में जाने से कतराते है।

सताधारी दल इन आंकड़ों को सही ठहरा रहा है। जद (यु) के प्रवक्ता श्याम रजक कहते हैं कि नीतीश सरकार में विधि-व्यवस्था में सुधार आई है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात है कि सरकार ने अपराधियों को सजा दिलाने का काम किया। अपराधियों में कानून का डर है, जबकि पिछली सरकार में अपराधी खुलेआम घूमते थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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