कर्नाटक : राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, भाजपा कराएगी विधायकों की परेड (राउंडअप)
राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की है तो विपक्षी विधायकों ने खुद को अयोग्य करार दिए जाने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस बीच, भाजपा ने मंगलवार को अपने 105 विधायकों की राष्ट्रपति के समक्ष परेड कराने की घोषणा की है। बहरहाल, यह लड़ाई अब राज्य की सीमा से बाहर निकलकर राजधानी दिल्ली पहुंच गई है।
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा , "सदस्यों को अयोग्य ठहराए जाने की प्रक्रिया अनैतिक थी।" रिपोर्ट में विधानसभा में ध्वनि मत से विश्वास प्रस्ताव पारित कराने और विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया के व्यवहार को केंद्र में रखा गया है।
विधानसभा में विश्वास मत से कुछ ही घंटे पहले विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 16 सदस्यों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद भारी हंगामे और भ्रम के माहौल में भाजपा ने ध्वनि मत से विश्वास मत हासिल कर लिया।
विधानसभा के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने ध्वनि मत से सदन पटल पर बहुमत साबित कर दिया। राज्यपाल के निर्देश पर विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया ने सुबह 10 बजे कार्यवाही शुरू की। इसके बाद सत्ता पक्ष के 106 विधायकों ने 'हां' कहा।"
इससे पहले, विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया ने 16 बागी विधायकों को अयोग्य करार कर दिया। इनमें 11 सत्ताधारी भाजपा से हैं जबकि पांच निर्दलीय हैं। विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने से सदन में कुल विधायकों की संख्या 225 से घटकर 208 हो गई। ऐसे में बहुमत साबित करने के लिए कुल 105 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। एक विधायक एंग्लो-इंडियन समुदाय का होता है।
भाजपा के 11 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद सदन में पार्टी विधायकों की संख्या घटकर 106 हो गई। इसमें विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं। इसके बाद कांग्रेस के 73 और जद (एस) के 28 विधायक हैं। छह विधायक निर्दलीय हैं।
ध्वनि मत से प्रस्ताव जीतने की घोषणा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी और सदन से बाहर चले गए। हालांकि कांग्रेस व जनता दल (सेक्युलर) के विधायक सदन में आसन के सामने विश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को लेकर विरोध जताते रहे।
विपक्षी कांग्रेस और जेडी (एस) ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए राजभवन जाकर 29 माह पुरानी येदियुरप्पा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। इस बीच, अयोग्य करार दिए गए 16 विधायकों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका पर सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी।
अदालत ने अभियोजन व बचाव पक्ष की ओर से जारी बहस दिन की समाप्ति तक पूरा न हो पाने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी।
उधर, कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्दारमैया ने पत्रकारों से कहा, "यह सब कुछ काफी जल्दबाजी में पांच से 10 मिनट के भीतर हुआ। सदन में कुछ भी ठीक तरीके से न तो सुना और न ही देखा जा सकता था। विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से विश्वास प्रस्ताव पेश करने को कहा और भाजपा विधायकों ने विश्वास मत के समर्थन में हाथ उठाए। हमें बोलने या बहस करने की अनुमति नहीं दी गई।"
जेडी (एस) के नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी राज्यपाल हंसराज भारद्वाज से मिलकर भाजपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग करेगी। कुमारस्वामी ने पत्रकारों से कहा, "हम सरकार की तुरंत बर्खास्तगी की मांग करते हैं। विश्वास प्रस्ताव पर सही तरीका नहीं अपनाया गया। ध्वनि मत की घोषणा करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सदन से फौरन बाहर चले गए।"
राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने रविवार को विधानसभा अध्यक्ष को बागी विधायकों को अयोग्य करार नहीं देने की सलाह दी थी। बोपैया ने राज्यपाल की सलाह के विपरीत कदम उठाते हुए विधायकों को मतदान से वंचित कर दिया।
बोपैया ने आठ अक्टूबर को इन सभी बागियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और रविवार शाम पांच बजे तक जवाब मांगा था।
भाजपा सरकार के विश्वास मत जीतने पर संतोष जाहिर करते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया और कहा, "कांग्रेस और जेडी (एस) ने भाजपा सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की।"
येदियुरप्पा से बगावत करने वाले विधायकों के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर गडकरी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया। गडकरी ने कहा, "वे बिक गए थे। उन्होंने पार्टी के साथ धोखा किया.. उन्हें निकाल बाहर कर दिया गया।"
इस बीच, कांग्रेस ने कहा कि कर्नाटक में लोकतंत्र और संविधान की हत्या हुई है और राज्यपाल द्वारा रिपोर्ट भेजे जाने के बाद वह अपनी रणनीति तय करेगी।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां कहा, "कर्नाटक में जो कुछ हुआ, वह न केवल लोकतंत्र की पूर्ण रूप से हत्या है, बल्कि देश में संविधान की हत्या भी। एक अल्पमत सरकार विधानसभा अध्यक्ष की कपटपूर्ण व जोड़तोड़ की कार्रवाई के जरिए बहुमत में बदल दी गई।"
कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, गुलाम नबी आजाद ने कहा कि विधानसभा के बाहर की घटनाएं विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। कई निर्दलीय विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने का जिक्र करते हुए आजाद ने कहा, "निर्दलीय विधायकों पर किसी भी राजनीतिक पार्टी का अधिकार नहीं है।"
इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता एम. वेंकैया नायडू ने कांग्रेस और जेडी (एस) पर 'गंदी चालें' चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा की सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल था जिस कारण उन्होंने विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications