येदियुरप्पा ने विश्वास प्रस्ताव जीता, ध्वनि मत पर विपक्ष नाराज (लीड-3)
इस बीच विपक्षी कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने आरोप लगाया है कि सारे घटनाक्रम को नियमों का उल्लंघन करके और जल्दबाजी में अंजाम दिया गया।
विधानसभा के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने ध्वनि मत से सदन पटल पर बहुमत साबित कर दिया। राज्यपाल के निर्देश पर विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया ने सुबह 10 बजे कार्यवाही शुरू की। इसके बाद सत्ता पक्ष के 106 विधायकों ने 'हां' कहा।"
यद्यपि, विपक्षी कांग्रेस और जद (एस) के विधायकों ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए राजभवन जाकर 29 माह पुरानी युदियुरप्पा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की ।
कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्दारमैया ने पत्रकारों से कहा, "यह सब कुछ काफी जल्दबाजी में पांच से 10 मिनट के भीतर हुआ। सदन में कुछ भी ठीक तरीके से न तो सुना और न ही देखा जा सकता था। विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से विश्वास प्रस्ताव पेश करने को कहा और भाजपा विधायकों ने विश्वास मत के समर्थन में हाथ उठाएं। हमें बोलने या बहस करने की अनुमति नहीं दी गई।"
इसके साथ ही राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और जद (एस) के नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी राज्यपाल हंसराज भारद्वाज से मिलकर भाजपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग करेगी।
कुमारस्वामी ने पत्रकारों से कहा, "हम सरकार की तुरंत बर्खास्तगी की मांग करते हैं। विश्वास प्रस्ताव पर सही तरीका नहीं अपनाया गया। ध्वनि मत की घोषणा करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सदन से फौरन बाहर चले गए।"
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैया ने 16 बागी विधायकों को अयोग्य करार कर दिया था। इनमें 11 सत्ताधारी भाजपा से हैं जबकि पांच निर्दलीय हैं। विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने से सदन में कुल विधायकों की संख्या 225 से घटकर 208 हो गई। ऐसे में बहुमत साबित करने के लिए कुल 105 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। एक विधायक एंग्लो-इंडियन समुदाय का होता है।
भाजपा के 11 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद सदन में पार्टी विधायकों की संख्या घटकर 106 हो गई। इसमें विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं। इसके बाद कांग्रेस के 73 और जद (एस) के 28 विधायक हैं। छह विधायक निर्दलीय हैं।
ध्वनि मत से प्रस्ताव जीतने की घोषणा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी और सदन से बाहर चले गए। हालांकि कांग्रेस व जद (एस) के विधायक सदन में आसन के सामने विश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को लेकर विरोध जताते रहे।
विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए सिद्दारमैया ने कहा कि संविधान में विश्वास प्रस्ताव पर ध्वनि मत की प्रक्रिया अपनाने का कोई प्रावधान नहीं है।
सिद्दारमैया ने कहा, "विधानसभा अध्यक्ष ने घोषणा की कि प्रस्ताव शून्य के मुकाबले 106 मतों से पारित हुआ है, इससे पता चलता है कि सदन के नियमों व प्रावधानों के मुताबिक मतदान की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। हम विधानसभा अध्यक्ष के इस कदम का विरोध करते हैं और राज्यपाल से सरकार को बर्खास्त करने की मांग करेंगे।"
इससे पहले रविवार को राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने विधानसभा अध्यक्ष को बागी विधायकों को अयोग्य करार नहीं देने की सलाह दी थी। बोपैया ने राज्यपाल की सलाह के विपरित कदम उठाते हुए विधायकों को मतदान से वंचित कर दिया।
विधानसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "विधानसभा अध्यक्ष ने सभी 16 बागी विधायकों को अयोग्य करार देने वाला पत्र स्वयं सौंपा। इस कारण उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव पर मतदान करने की अनुमति नहीं होगी।"
अयोग्य करार दिए गए विधायकों ने मुख्यमंत्री के प्रति असंतोष जाहिर करते हुए विगत छह अक्टूबर को 29 महीने पुरानी येदियुरप्पा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
बोपैया ने आठ अक्टूबर को इन सभी बागियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और रविवार शाम पांच बजे तक जवाब मांगा था।
इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता एम. वैंकैया नायडू ने कांग्रेस और जद (एस) पर 'गंदी चालें' चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा की सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल था जिस कारण उन्होंने विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया।
नायडू ने एक टेलीविजन चैनल से कहा, "कांग्रेस और जद (एस) ने गंदी चालें चली हैं। उन्होंने हंगामा किया.. मुख्यमंत्री का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। हमें इसकी बहुत खुशी है। हमारे पास संख्या बल था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications