गाल की कोशिकाओं से फेफड़े के कैंसर का अनुमान संभव
इस नई तकनीक को 'पार्सियल वेव स्पेक्ट्रोस्कोपी' (पीडब्ल्यूएस) नाम दिया गया है। इसके जरिए कैंसर ग्रस्त लोगों और स्वस्थ लोगों में अंतर स्थापित किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य पत्रिका 'कैंसर रिसर्च' के अनुसार इंग्लैंड और वेल्स में फेफड़े का कैंसर रोगियों की संख्या के आधार पर दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2007 में इस बीमारी से 29,660 लोग मारे गए थे।
अमेरिका में नॉर्थवेस्टर्न यनिवर्सिटी और न्यूयार्क युनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने महसूस किया है कि फेफड़े के कैंसर से पीड़ित मरीजों के गालों पर इसके लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं।
वैज्ञानिकों को लगता है कि इस बीमारी से प्रभावित मरीजों की कोशिकाओं में स्पष्ट अंतर दिखने लगता है।
नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता हेमंत रॉय ने कहा, "यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे फेफड़े के शुरुआती खतरे के बारे में पता चलता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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