गोवा में 'गाय खरीदो, बाघ बचाओ' अभियान
पणजी, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। गोवा में वन्यजीव संरक्षण से आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता गोवा के समृद्ध वनों को बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं ने एक विधवा महिला को मुआवजा चुकाने के लिए नायाब तरीका ढूंढ़ निकाला है, जिसकी गाय को सितम्बर में बाघ खा गया था।
धांगर जनजाति समुदाय की साई पिंगले (55) की दुधारू गाय उसके जीवन का आधार थी। वह अपने दो बच्चों के साथ महदेई वन्यजीव अभयारण्य के समीप पोनसुली गांव में रहती है।
प्रसिद्ध वन्यजीव कार्यकर्ता राजेंद्र केरकर ने आईएएनएस को बताया, "हमने महिला को दूसरी गाय खरीद कर देने के लिए पैसा जुटाने का फैसला किया है। जिससे कि स्थानीय लोग बाघ को न मारें। उन्हें यह समझाना बहुत जरूरी है कि जंगल के लिए जानवर बेहद महत्वपूर्ण हैं।"
केरकर एक गैर सरकारी संगठन 'विवेकान्द पर्यावरण जागरूकता ब्रिगेड'(वीईएबी) के साथ मिलकर काम करते हैं। वीईएबी गाय खरीदने के लिए चंदा जुटाने में लगा हुआ है।
उन्होंने कहा, "बाघ ने एक देशी नस्ल की गाय को मारा था, जिसकी कीमत केवल 15,000 रुपये है। लेकिन बाघ अमूल्य है।"
केरकर कुछ व्यावहारिक कारणों से बेहद चिंतित हैं। पिछले साल महदेई वन्यजीव अभयारण्य में ही 'मजीक' जनजातीय समुदाय के लोगों ने एक बाघ का शिकार कर लिया था। मजेदार बात यह है कि वन विभाग के शीर्ष आधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने घटना को दबाने की भरपूर कोशिश की थी। हालांकि केरकर के कहने पर मुख्य वन संरक्षक शशि कुमार ने मामले को उजागर किया था।
वन्यजीव कार्यकर्ता ने कहा, "स्थानीय लोगों को लगता है कि अपने पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चत कराने के लिए बाघ को मारना आवश्यक है। अगर महदेई वन्यजीव अभयारण्य में बाघ कभी-कभी दिखता है, तो उससे स्थानीय निवासियों को डरना नहीं चाहिए।"
केरकर ने कहा कि अभयारण्य के समीप रहने वाले साई पिंगल जनजातीय समुदाय के लोगों को बाघ का शिकार नहीं करना चाहिए।
ऐसा नहीं है कि पिंगले की गाय को बाघ ने पहली दफा मारा है। गोवा के अभयारण्य क्षेत्रों में बढ़ रहे खनन और उसके आसपास रिहायसी इलाकों के बसने के कारण ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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