विश्व के कई हिस्सों में गरीबी बढ़ी है : प्रणब मुखर्जी
वे अमेरिका में आयोजित जी 24 देशों की वित्तमंत्रियों की बैठक में बोल रहे थे। मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाले हालिया घटनाक्रम संकेत देते हैं कि जब सतत विकास शुरू होगा तो वह सुस्त और धीमा होगा, जिसकी कल्पना नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के खतरे भवन निर्माण क्षेत्र में दखल दे सकते हैं, जिसके कारण रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उभरते हुए बाजारों और विकासशील देशों ने बेहतर तरीके से संकट को कम करने का प्रयास किया है, लेकिन हमें कमजोरियों के प्रति और सावधान रहने की जरूरत है।
प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 2009 के खरीद क्षमता समानता के संदर्भ में उभरता बाजार संबंधी ऋण जारी करने वाले देश (ईएमडीसी) विश्व सकल घरेलू उत्पाद में 47़5 प्रतिशत की हिस्सेदारी करते हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष में उनके पास केवल 39़5 प्रतिशत का कोटा है। इसलिए विकसित देशों को ईएमडीसी के लिए पांच से छह प्रतिशत हिस्सा छोड़ देना चाहिए ताकि मौजूदा वैश्विक आर्थिक वास्तविकताएं बेहतर तरीके से परिलक्षित हो सकें।
विश्व बैंक की चर्चा करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हमने ध्वनिमत आधारित सुधार के जरिए सब सहारा अफ्रीका के लिए एक अतिरिक्त आसन प्राप्त किया है ताकि विकासशील एवं संक्रमणशील देशों के लिए समानता पैदा करने की दिशा में बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि पूंजी के मोर्चे पर हमने अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) की ऋण देने की क्षमता बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है, जिसके कारण वह विकासशील देशों के लिए ज्ञान और संसाधनों का स्रोत बना रहे।
मुखर्जी ने कहा कि विश्व बैंक का दायरा बहुत बढ़ गया है और गरीब देशों के लिए बहुस्तरीय रक्षाकवच बनाने के लिए और संसाधनों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ 16 (आईडीए16) निधि अनुदान को उसके नियत दायरे से बाहर निकालना पड़ेगा ताकि उसे लंबे समय तक कायम रखा जा सके। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक को अपना ध्यान गरीबी मिटाने पर लगाए रखना चाहिए। जहां तक जलवायु परिवर्तन का सवाल है तो इस दिशा में उसे सस्ती दरों पर ऊर्जा तक पहुंच बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
वित्तमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक को कृषि और ढांचागत संरचनाओं पर दोबारा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जी 24 एक ऐसा प्रभावशाली मंच हो सकता है जहां हम अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने कार्यकलापों और उससे उत्पन्न नतीजों को सूत्रबद्घ कर सकते हैं।
इंडो-एशिन न्यूज सर्विस।


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