दशहरा उत्सव में डूबा मैसूर
विजयनगर और वोदेयर वंश के यशस्वी साम्राज्य की याद ताजा कराने वाली इस परंपरा को वार्षिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस सांस्कृतिक पर्व के 400वीं वर्षगांठ के मौके पर शहर की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का प्रदर्शन किया जाएगा।
धर्मशाला मंदिर न्यास के अध्यक्ष डी. वीरेंद्र हेगड़े ने शुक्रवार को चामुंडी पहाड़ी पर हिंदू देवी चामुंडेश्वरी का आह्वान करने के साथ इस उत्सव की शुरुआत की। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और वोदेयर के शाही वंशज उपस्थित थे।
इस मौके पर हेगड़े ने कहा, "मैं दशहरा परंपरा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वोदेयर वंश को बधाई देता हूं। यह परंपरा 14वीं शताब्दी के विजयनगर शासकों का स्मरण कराती है।"
शरद ऋतु में मनाया जाने वाला यह उत्सव बुराई के खिलाफ अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। माना जाता है कि शक्ति की देवी दुर्गा का अवतार चामुंडेश्वरी ने दस दिनों की लड़ाई के बाद राक्षस महिसासुर का वध किया था।
दशहरा महोत्सव समिति के एक अधिकारी के अनुसार इस उत्सव के दौरान शास्त्रीय और लोकप्रिय नृत्य के साथ-साथ लोकगीत और संगीत का भी आयोजन किया जाएगा।
अधिकारी ने बताया कि इस उत्सव में कई दशकों से समाज के अलग-अलग वर्गो के लोग उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं। उत्सव में महिलाओं, ग्रामीण मान्यताओं और युवा शक्ति पर केंद्रित समारोह भी प्रस्तुत किए जाते हैं।
उन्होंने बताया, "उत्सव के दौरान मैसूर गुजरे जमाने के महाराजाओं, महलों, रथ और पालकियों की यादों में खो जाता है।"
उत्सव में लोकप्रिय शास्त्रीय गायक अनूप जलोटा, राजशेखर मंसूर, कैलाश खेर और सोनू निगम अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
उत्सव के अंतिम दिन 17 अक्टूबर को महल से एक बड़ा जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस शहर से होते हुए मेले और बन्नीमंतप मैदान तक जाएगा। इस विजय जुलूस में सुसज्जित हाथियों की 'जंबू सवारी' आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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