30 साल बाद मिलीं बिछड़ी बहनें
सेना ने वामपंथी छापामारों की खोज में 30 साल पहले कैनकैप गांव में छापा मारा था। तब से दोनों बहनें एक-दूसरे से मिल नहीं पाई थीं।
इस गृहयुद्ध के शिकार लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर सरकारी संगठन 'म्युचूअल सपोर्ट ग्रुप' (जीएएम) के मारियो पोलांको ने संवाददाताओं को बताया कि दक्षिणी एसक्यूटिंला राज्य के एक चर्च में उनकी मुलाकात जुएना चैमेय से हुई थी। उसके बाद वह जुएना की बहन मैगडालेना से पश्चिमोत्तर क्विच क्षेत्र के कोटजैल कस्बे में मिले थे।
सेना ने उनके पिता मिगेल चमय और मां पेट्रोनिला टोमा से व्रिदोहियों के बारे में जानकारी लेने के लिए उन्हें उनके घर से उठाकर उनसे सख्ती से पूछताछ की थी। बाद में जब उन्हें लगा कि उनके माता-पिता व्रिदोहियों के बारे में कुछ नहीं जानते हैं तो उन्होंने जोर-जबरदस्ती से उनके परिवार का विघटन कर दिया।
छापे के दौरान घायल जुएना को इलाज के लिए एसक्यूटिंला के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां की नर्स ग्वेडल्यूप मेंडिज ने उसे गोद ले लिया। बाद में नर्स जुएना के साथ ग्वाटेमाला सिटी में रहने लगी।
सात वर्षीया बच्ची की मां जुएना ने बताया नर्स ने उसे अपनी बेटी की तरह पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया।
उधर, मैगडालेना अपनी दादी के साथ क्विच के सैन जुएन कोटजैल में रही। अब उसके दो बच्चे हैं।
दोनों बहने एक-दूसरे से मिलने के बाद बहुत खुश हैं।
पोलांको ने बताया कि जीएम और रेड क्रॉस के संयुक्त अभियान ने वर्ष 2001 से अब तक 100 से अधिक बिछड़े रिश्तेदारों को मिलाने में मदद की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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