कर्नाटक में संकट बरकरार, असंतुष्टों का झुकने से इंकार (राउंडअप)

पणजी, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में कई दिनों से जारी बी.एस.येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार का संकट जस का तस बना हुआ है। इस बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी.कुमारस्वामी ने कहा कि असंतुष्ट विधायक किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं, चाहे वह भाजपा हो, जनता दल (सेक्युलर) हो या फिर कांग्रेस।

इसके पहले वरिष्ठ भाजपा नेता मनोहर पारिकर ने शुक्रवार को कहा कि कर्नाटक में पैदा राजनीतिक संकट शनिवार तक खत्म हो जाएगा।

पारिकर ने शुक्रवार की सुबह यहां के एक पांच सितारा होठल में ठहरे कर्नाटक के बागी विधायकों से बातचीत करने के बाद यह बात कही।

होटल के बाहर पत्रकारों को संबोधित करते हुए पारिकर ने जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच. डी. कुमारस्वामी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया। कर्नाटक के 14 बागी विधायक इसी होटल में ठहरे हुए हैं।

पारिकर ने कहा कि यह पार्टी के भीतर का विवाद है और इसे शनिवार तक सुलझा लिया जाएगा।

उन्होंने कहा, "मैंने हर किसी से मुलाकात की। निर्दलीय विधायकों से भी। मैंने विधायकों को भाजपा में बने रहने को कहा।" उन्होंने कहा कि स्थिति धीरे-धीरे ठीक हो रही है।

पारिकर ने कहा, "एच. डी. कुमारस्वामी यहां खरीद-फरोख्त के लिए आए हैं। हम क्यों खरीद-फरोख्त में शामिल हों। वे हमारे अपने विधायक हैं।"

विधायकों से मुलाकात से पहले पारिकर ने कहा, "कुछ मुद्दे हैं जिन पर हम चर्चा करेंगे और उनका समाधान निकालेंगे। मुझे ऐसा विश्वास है।"

इन विधायकों से बंद कमरे में मुलाकात करने के बाद एच.डी.कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि विश्वास मत के दौरान कर्नाटक की भाजपा सरकार गिर जाएगी।

कुमारस्वामी ने कहा, "उस समय का इंतजार कीजिए। आपको खुद महसूस करेंगे। सभी असंतुष्ट विधायक एकजुट हैं।"

कुमारस्वामी ने उस सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया, जिसमें उनसे यह पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी भविष्य में राज्य में कांग्रेस की सरकार का समर्थन करेगी।

कुमारस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा द्वारा लगाया गया वह आरोप झूठा है, जिसमें उन्होंने कुमारस्वामी पर विधायकों के खरीद-फरोख्त में लिप्त होने की बात कही है। उन्होंने कहा, "आपको जल्द ही पता चल जाएगा कि खरीद-फरोख्त में कौन लिप्त है।"

कर्नाटक भाजपा के नौ और पांच निर्दलीय विधायक बागी तेवर अपनाने के बाद गुरुवार से यहां के ताज एग्जोटिका में ठहरे हुए हैं। यद्यपि, भाजपा की कर्नाटक इकाई ने आरोप लगाया है कि उसके विधायकों को बंधक बनाया गया है।

गोवा में मौजूद कर्नाटक के पर्यटन मंत्री जर्नादन रेड्डी ने कहा, "उन्हें पुलिस के सहयोग से नजरबंद रखा गया है। शुरू में उनसे किसी को मिलने तक की इजाजत नहीं थी।"

उन्होंने कहा कि भाजपा के उत्तरी गोवा से सांसद श्रीपद नाइक, पारिकर और राज्य भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत परसेंकर को भी होटल में घुसने से सुरक्षाकर्मियों ने रोका। बाद में नाइक और पारिकर को होटल में जाने दिया गया, लेकिन उनके वाहन को होटल परिसर में नहीं घुसने दिया गया।

इधर, कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के.जी. बोपैया ने सत्तारूढ़ भाजपा के 11 विधायकों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर पूछा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण उन्हें क्यों न अयोग्य करार दिया जाए।

विधानसभा सचिव बी.एस. पाटील ने आईएएनएस को बताया, "विधानसभा अध्यक्ष ने असंतुष्ट विधायकों को 'कारण बताओ' नोटिस देकर उन्हें रविवार शाम पांच बजे तक जवाब देने को कहा है। इन विधायकों पर सरकार से समर्थन वापस लेने सहित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।"

विधानसभा अध्यक्ष ने सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से आवेदन मिलने के बाद विधानसभा सचिव के माध्यम से नोटिस जारी किया। गुरुवार देर शाम दिए गए आवेदन में दलबदल-निरोधक अधिनियम, 1985 का हवाला देते हुए पार्टी के 14 बागी और पांच निर्दलीय विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी।

इससे पहले बुधवार को इन विधायकों ने राज्यपाल एच.आर. भारद्वाज के समक्ष सरकार से समर्थन वापस लेने तथा मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व में विश्वास कायम न रहने सम्बंधी संयुक्त पत्र पेश किया था।

ये विधायक हैं- आबकारी मंत्री एम. पी. रेणुकाचार्य, गोपालकृष्णा बेलुरू, आनंद अस्नोतिकर, बालाचंद्रन जा*++++++++++++++++++++++++++++र्*होली, बी.एन. सार्वभौमा, भरमगौड़ा कागे, वाई सम्पांगी, जी.एन. नंजुडास्वामी, एम.वी. नागराजू, शिवन गौड़ा नायक एवं एच.एस. शंकरालिंगे गौड़ा।

बागियों पर अन्य आरोप यह है कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी जनता दल (सेक्युलर) तथा निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार को अल्पमत में लाया और राज्य में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न की।

येदियुरप्पा ने गुरुवार को अस्नोतिकर एवं जार्किहोली को मांत्रिपरिषद से बाहर कर दिया। बुधवार को उन्होंने चार स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों को अपने नेतृत्व के विरुद्ध बगावत करने पर मंत्री पद से हटाया था। इनमें शामिल हैं कृषि विपणन एवं लघु उद्योग मंत्री शिवराज एस. तंगाडागी, वस्त्र एवं रेशम पालन मंत्री वेंकटारमानप्पा, समाज कल्याण मंत्री पी.एम. नरेंद्र स्वामी तथा युवा सेवा एवं कारागार मंत्री डी. सुधाकर।

दलबदल-निरोधक अधिनियम के तहत असंतुष्ट विधायकों को पार्टी से निष्कासन का समाना करना पड़ सकता है तथा पार्टी के अनुदेश का उल्लंघन करने और विश्वास मत के विरुद्ध मतदान करने पर छह साल के लिए चुनाव लड़ने से वंचित किए जा सकते हैं।

राज्यपाल के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री 11 अक्टूबर को विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे।

उल्लेखनीय है कि 225 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के प्रभावी 117, कांग्रेस के 73, जनता दल (एस) के 28 एवं छह निर्दलीय सदस्य हैं।

दूसरी ओर कर्नाटक संकट से सजग कांग्रेस, अपने सभी विधायकों को शुक्रवार को महाराष्ट्र के लोनावला शहर उठा ले गई, ताकि उन्हें भाजपा के प्रलोभनों से बचाया जा सके।

कांग्रेस विधायकों का 73 सदस्यीय समूह कुछ कार्यकर्ताओं के साथ जेट एयरवेज विमान से दोपहर बाद लगभग दो बजे बेंगलुरू से पुणे पहुंचा।

हवाई अड्डे से वे लगभग 20 किलो मीटर दूर सीधे एम्बी वैली पहुंचे। लोनावला पहाड़ी क्षेत्र के बाहरी इलाके में सहारा ग्रुप ने आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह निजी शहर बसाया है।

ताजा हालात की जानकारी देते हुए कर्नाटक कांग्रेस के महासचिव एम. रामचंद्रप्पा ने कहा कि सभी विधायक 'सुरक्षित एवं ठीक-ठाक' हैं।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, "यहां रविवार रात तक ठहरने की हमारी योजना है और संभावना है कि अगले सोमवार को कर्नाटक विधानसभा में सरकार के विश्वास मत हासिल करने की प्रकिया के दौरान वहां उपस्थित हो जाएंगे।"

एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक विधायकों में से एक यहां पहुंचते ही बीमार हो गए। आम्बी वैली के चिकित्साकर्मी उनके उपचार में लगे हुए हैं।

कांग्रेस की कर्नाटक इकाई प्रमुख माणिराव ठाकरे ने हालांकि ताजा स्थिति की जानकारी होने से इंकार किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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