पड़ोसी मुल्क में सुरक्षा परिदृश्य विस्फोटक : वायुसेना प्रमुख (लीड-2)
वायु सेना दिवस पर यहां आयोजित परेड के दौरान अपने संबोधन में वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल पी. वी. नाइक ने कहा, "पड़ोस में मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य ज्वालामुखी की तरह है और वह बगैर किसी चेतावनी के कभी भी आपके कौशल की परीक्षा ले सकता है। ऐसे समय में त्वरित कार्रवाई की जरूरत होती है। अधिक सतर्क और तत्पर बने रहिए।"
नाइक ने बाद में मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि "ऐसा कोई नया खतरा नहीं है।" उन्होंने कहा, "मैंने सुरक्षा हालात को विस्फोटक इसलिए बताया, क्योंकि उसके बारे में कुछ पता नहीं है कि वह कब फट जाए।"
नाइक ने कहा कि सामरिक तत्परता और मौजूदा क्षमताओं का बारीकी के साथ उपयोग, किसी भी खतरे से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना अगले पांच-सात वर्षो में एक प्रबल वायु शक्ति के रूप में होगी और उन्नत प्रौद्योगिकी को आसानी से अपना लिया जाएगा।
नाइक ने कहा, "वायुसेना, नेटवर्क केंद्रित अंतरिक्ष शक्ति बनने की ओर तेजी के साथ बढ़ चला है।" नाइक ने नए एएसएनईटी संचार तंत्र की ओर संकेत किया, जिसने वायुसेना के संचालन के तरीके को बदल दिया है।
अपनी परिवर्तनकारी योजना के तहत वायु सेना अपने बेड़े में वर्ष 2017 तक पांचवीं पीढ़ी के लगभग 250-300 लड़ाकू विमान (एफजीएफए) शामिल करने पर विचार कर रहा है। ये विमान रूस के साथ मिल कर विकसित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा अतिरिक्त सुखोई-30एमकेआई, मिडियम मल्टी-रोल लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) और निर्माणाधीन स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान, तेजस को भी वायु सेना के बेड़े में शामिल किया जाना है। उम्मीद है कि तेजस को मई 2011 तक बेड़े में शामिल कर दिया जाएगा।
नाइक ने कहा, "वायु़ सेना की जमीन और उसकी संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षा और हिफाजत के लिए नई प्रौद्योगिकी अपनाने और सभी प्रणालियों को प्रभावी रूप से संचालित करने की हमारी जिम्मेदारी बनती है।"
वायु सेना के 78वें स्थापना दिवस के मौके पर हिंडन एयर बेस पर शानदार परेड का आयोजन किया गया और विमानों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए।
विमानों ने आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग के धुएं छोड़ कर तिरंगे का दृश्य प्रस्तुत किया। वायु सेना ने दिखा दिया कि वह किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम है।
एयर बेस पर आयोजित प्रदर्शनी में कुछ विमानों और युद्धक साजो-सामान शामिल किए गए। ये वायु सेना के घातक आक्रामक क्षमता की झलक दे रहे थे। इन साजो-सामान में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, लड़ाकू विमान मिग-29, एमआई-17 1वी मिडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टर, वाहक विमान डोर्नियर, उन्नत जेट प्रशिक्षक हाक एमके 132, मिराज-2000, जगुआर, मिग-21 बिजोन व सुखोई-30 एमकेआई के अलावा रूस निर्मित पचोरा मिसाइल के लिए ट्रांसपोर्टर एंड लोडिंग व्हिकल्स (टीएलवी) शामिल थे।
सुबह की शुरुआत हजारों दर्शकों की तीव्र हर्षध्वनि के साथ हुई। स्काईडाइवर्स ने वायु सेना का ध्वज लिए आसमान से नीचे की ओर गोता लगाया। इसके बाद एक प्रभावपूर्ण फ्लाईपास्ट हुआ। लेकिन कम दृश्यता के कारण शो का कुछ मजा किरकिरा हो गया।
एयर शो की शुरुआत डोर्नियर विमान और उसके दोनों तरफ दो एवरोज और दो एएन-32 द्वारा तैयार किए गए एक स्पेक्ट्रम से हुई।
फ्लाईपास्ट में सबसे आगे तीन जगुआर विमान थे। उसके बाद तीन बिजोन (मिग-21), बाज (मिग-29), वज्र (मिराज 2000) विमान और एक एसयू-30 एमकेआई विमान था।
तीन सुखोई विमानों ने आसमान में करतब दिखाते हुए एक त्रिसूल की आकृति निर्मित की।
एयर शो के पहले परंपरागत परेड का आयोजन किया गया। वायु सेना प्रमुख, नाइक ने परेड का निरीक्षण किया और फिर सलामी ली। यह परेड प्रति वर्ष आयोजित की जाती है। यह परेड राष्ट्र सेवा के प्रति वायु सेना के समर्पण के संकल्प के लिए तथा देशवासियों को इसकी ताकत और तत्परता का भरोसा दिलाने के लिए आयोजित की जाती है।
इस अवसर पर नाइक ने 25 वायु सेना पदक भी प्रदान किए। इसमें नौ वीरता के लिए थे। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील की ओर से 30 विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किया। नाइक ने वायु सेना की चार इकाइयों को विशिष्ट प्रदर्शन के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।
स्थापना दिवस के मौके पर हिंडन के अलावा पश्चिमी वायु सेना कमांड के अंबाला, हलवाडा और आदमपुर एयरबेस पर भी विमानों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना का गठन आठ अक्टूबर 1932 को किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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