बिहार में नारों के सहारे जनता तक पहुंचने में जुटे नेता

पटना, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजनीति में या किसी भी आंदोलन में नारों का अपना महत्व होता है। बिहार में विधानसभा चुनाव से पूर्व दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच शुरू 'कविता युद्घ' पर तो विराम लग गया है परंतु प्रमुख पार्टियों के बीच अब 'नारा युद्घ' की शुरुआत हो गई है।

राजनीतिक दल कम शब्दों में अपनी बात कहने और लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान नारों का सहारा लेते हैं। विधानसभा चुनाव में भी राज्य के राजनीतिक दल नारों का सहारा लेने में जुटे हुए हैं ताकि उसके माध्यम से जनता के बीच लोकप्रियता बढ़ाई जा सके।

राज्य की सत्ताधारी जनता दल (युनाइटेड) 'बोल रहा है टी़ वी़ अखबार, सबसे आगे नीतीश कुमार', 'बढ़ता बिहार, नीतीश कुमार' और 'पांच साल बनाम 55 साल' जैसे नारों से लोगों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है तो सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए 'अपना वोट विकास को', 'बढ़ता बिहार, बनता बिहार', पांच साल, बिहार खुशहाल' जैसे नारों से लोगों को रिझाने में जुटी हुई है।

राज्य में दो दशकों के बाद अपने बलबूते सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी कांग्रेस भी नारों के मामले में पीछे नहीं है। कांग्रेस ने 'ना कोई बात-ना कोई जात, सिर्फ राहुल की बात, कांग्रेस के साथ' और 'हमारी लड़ाई उनसे है, जो सिर्फ बातें बनाते हैं जरूरत है काम की, बिहार के उंचे नाम की' जैसे का नारों के सहारे चुनावी मैदान में उतर चुकी है।

इधर, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 'भ्रष्टाचार मिटाओ, कुशासन भगाओ' तथा उसकी सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) 'लोजपा-राजद गठबंधन की है ललकार, चुनाव के बाद मेरी सरकार' जैसे नारों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत में जुटी हुई है।

नारों के इस युद्ध में वामपंथी दल भी पीछे नजर नहीं आ रहे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्‍सवादी-लेनिनवादी) ने 'नीतीश बाबू का नया बिहार, घोषणाबाजी व भ्रष्टचार', 'भाकपा माले की यही पुकार, भूमि सुधार, नया बिहार' जैसे नारों को लेकर अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कवायद में जुटी हुई है।

बहरहाल, राज्य में चुनाव प्रचार अब धीरे-धीरे जोर पकड़ता जा रहा है और किस पार्टी का नारा मतदाताओं को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा के 243 सीटों के लिए छह चरणों में 21 अक्टूबर से 20 नवम्बर तक चुनाव होंगे। सभी सीटों की मतगणना 24 नवंबर को होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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