कर्नाटक में बागी भाजपा विधायकों को कारण बताओ नोटिस
बेंगलुरू, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के.जी. बोपैया ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 11 विधायकों को 'कारण बताओ' नोटिस देकर पूछा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण उन्हें क्यों न अयोग्य करार दिया जाए।
विधानसभा के सचिव बी.एस. पाटील ने आईएएनएस को बताया, "विधानसभा अध्यक्ष ने असंतुष्ट विधायकों को 'कारण बताओ' नोटिस देकर उन्हें रविवार शाम पांच बजे तक जवाब देने को कहा। इन विधायकों पर सरकार से समर्थन वापस लेने सहित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।"
विधानसभा अध्यक्ष ने सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से आवेदन मिलने के बाद विधानसभा सचिव के माध्यम से नोटिस जारी किया। गुरुवार देर शाम दिए गए आवेदन में दलबदल-निरोधक अधिनियम, 1985 का हवाला देते हुए पार्टी के 14 बागी और पांच निर्दलीय विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई।
इससे पहले बुधवार को इन विधायकों ने राज्यपाल एच.आर. भारद्वाज के समक्ष सरकार से समर्थन वापस लेने तथा मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व में विश्वास कायम न रहने सम्बंधी संयुक्त पत्र पेश किया था।
ये विधायक हैं- आबकारी मंत्री एम. पी. रेणुकाचार्य, गोपालकृष्णा बेलुरू, आनंद अस्नोतिकर, बालाचंद्रन जा*++++++++++++++++++++++++++++र्*होली, बी.एन. सार्वभौमा, भरमगौड़ा कागे, वाई सम्पांगी, जी.एन. नंजुडास्वामी, एम.वी. नागराजू, शिवन गौड़ा नायक एवं एच.एस. शंकरालिंगे गौड़ा।
बागियों पर अन्य आरोप यह है कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी जनता दल (सेक्युलर) तथा निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार को अल्पमत में लाया और राज्य में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न की।
येदियुरप्पा ने गुरुवार को अस्नोतिकर एवं जार्किहोली को मांत्रिपरिषद से बाहर कर दिया। बुधवार को उन्होंने चार स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों को अपने नेतृत्व के विरुद्ध बगावत करने पर मंत्री पद से हटाया था। इनमें शामिल हैं कृषि विपणन एवं लघु उद्योग मंत्री शिवराज एस. तंगाडागी, वस्त्र एवं रेशम पालन मंत्री वेंकटारमानप्पा, समाज कल्याण मंत्री पी.एम. नरेंद्र स्वामी तथा युवा सेवा एवं कारागार मंत्री डी. सुधाकर।
दलबदल-निरोधक अधिनियम के तहत असंतुष्ट विधायकों को पार्टी से निष्कासन का समाना करना पड़ सकता है तथा पार्टी के अनुदेश का उल्लंघन करने और विश्वास मत के विरुद्ध मतदान करने पर छह साल के लिए चुनाव लड़ने से वंचित किए जा सकते हैं।
राज्यपाल के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री 11 अक्टूबर को विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे।
उल्लेखनीय है कि 225 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के प्रभावी 117, कांग्रेस के 73, जनता दल (एस) के 28 एवं छह निर्दलीय सदस्य हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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