भारत में 2 से 7 करोड़ मकानों की कमी
वाशिंगटन, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में दो से सात करोड़ मकानों की कमी है, इनमें से आधे से ज्यादा मकानों की कमी को बाजार के जरिए पूरा किया जा सकता है। यह बात विश्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है।
शहरीकरण की तीव्र गति और मध्यवर्ग में वृद्धि के चलते दक्षिण एशिया में आवास और आवासीय वित्तीयन क्षेत्र की मांग तेजी से बढ़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में आवास और आवासीय वित्तीयन बाजार की विकास दर पिछले एक दशक में 30 प्रतिशत रही है लेकिन उच्च आय वर्ग के क्षेत्र में यह दर सीमित रही है।
रिपोर्ट में दक्षिण एशिया में मकानों की कमी को रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है कि मोर्टगेज को गरीबों और कम आय वाले लोगों के लिए उपलब्ध कराने की जरूरत है।
विश्व बैंक के वित्तीय एवं निजी क्षेत्र विकास उपाध्यक्ष ने कहा जनमित्र दीवान ने कहा, "मोर्टगेज उत्पादों में नवाचार और इन्हें ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप बनाकर मकानों को ज्यादा परिवारों की पहुंच में लाया जा सकता है।"
"आवास और आवासीय वित्तीयन क्षेत्र को मध्यम और कम आय वाले लोगों तक पहुंचाने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। इस क्षेत्र में बेहतर संस्थान, नीतियां और नए उत्पाद लाने की जरूरत है। भारत जैसे देशों में इसकी शुरुआत हो चुकी है।"
भारत में 2.3 करोड़ से 21.8 करोड़ आवासों का निर्माण वाणिज्यिक रूप से लाभदायक श्रेणी में है। यहां पांच हजार से 10 हजार मासिक आय वाले लोगों के लिए यह मकान उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
दुनिया की चौथाई जनसंख्या दक्षिण एशिया में रहती है और दक्षिण एशिया की 14 प्रतिशत लोगों के पास आवास नहीं है। इनमें ऐसे 45 प्रतिशत लोग शामिल नहीं हैं जो बेहद भीड़ वाली जगहों पर रह रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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