भारत ने आईएमएफ में शक्ति हस्तांतरण की मांग की
वाशिंगटन, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। विकासील देशों के संगठन जी-24 की एक बैठक में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में अमीर देशों के पास केंद्रित शक्ति को विकासशील देशों को हस्तांतरित करने की मांग की है। भारत ने कहा कि इससे वैश्विक आर्थिक संकट के बाद इस संगठन की विश्वसनीयता पुनस्र्थापित होगी।
जी-24 के वित्त मंत्रियों और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों ने गुरुवार को कहा, "आईएमएफ की वैद्यता, प्रासंगिकता और प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतिनिधित्व की खामियों को दूर किया गया है या नहीं।"
आईएमएफ- विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले हुई इस बैठक के बाद जारी हुए दस्तावेज में आईएमएफ के कोटा में से पांच प्रतिशत मतभार विकसित देशों से विकासशील देशों को हस्तांतरित करने की बात कही गई।
इससे पहले एक बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "इन बदलावों से आईएमएफ की विश्वसनीयता बढ़ेगी। यदि कोटा प्रणाली और प्रशासन संबंधी बदलाव कर दिए जाते हैं तो कोष की वैद्यता पुनस्र्थापित होगी।"
उन्होंने कहा कि कोटा प्रणाली में पांच से छह प्रतिशत हिस्सेदारी का हस्तांतरण विकासशील देशों को होना चाहिए। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थितियां प्रतिबिम्बित होंगी।
मुखर्जी ने कहा कि कोष और विश्व बैंक को जनादेश को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "2009 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में विकासशील देशों की हिस्सेदारी 47.5 प्रतिशत थी लेकिन आईएमएफ में इन्हें 39.5 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली। हमारा मानना है कि कोटा का पुनर्गठन सुधारों का प्रमुख अवयव है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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