इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों की अनोखी पहल
हिंदू छात्रावास में रहने वाले इन शोध छात्रों (रिसर्च स्कॉलर) से करीब 30 गरीब बच्चे नियिमत रूप से छात्रावास आकर पढ़ाई करते हैं।
इस पहल की शुरुआत करने वाले शोध छात्र प्रमोद शर्मा ने आईएएनएस से कहा कि गरीब और निर्धन बच्चों को पढ़ाकर हमें बहुत संतोष मिलता है। हम लोग कोई आसधारण काम नहीं कर रहे हैं। वास्तव में यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है।
विश्वविद्यालय के छात्र हिंदी, अंग्रेजी के अक्षरज्ञान और गणित के गुणा-भाग के अलावा इन बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ भी पढ़ाते हैं। पढ़ने आने वाले बच्चों में कोई कूड़ा बीनता है तो कोई सड़क के किनारे बांस के पंखे, टोकरियां और सजावटी सामान बेचता है। सभी बच्चे पास की एक बस्ती में रहते हैं।
शर्मा कहते हैं कि सभी बच्चे बेहद गरीब परिवारों से हैं, जहां इनको नैतिक मूल्यों के महत्व के बारे में समझाने वाला कोई नहीं है। हम नैतिक मूल्यों का समावेश करके इन्हें बेहतर इंसान बनाना चाहते हैं। आमतौर पर हम कहानियों की मदद से इन्हें प्रेरित करते हैं।
वर्तमान समय में शर्मा के साथ इस नेक पहल में हिंदू छात्रावास के करीब 13 शोध छात्र शामिल हैं।
शर्मा याद करते हुए कहते हैं कि करीब पांच महीने पहले छात्रावास के निकट बांस से बना सजावटी सामान बेच रहे बच्चों से उन्होंने एक झ्झूमर खरीदा था। बाद में वह नियमित अंतराल पर इन बच्चों से खरीददारी करने लगे थे। धीरे-धीरे उनका इनसे एक लगाव सा हो गया। फिर उन्होंने इन बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया।
शर्मा के मुताबिक वह इन बच्चों के लिए कुछ रचनात्मक करना चाहते थे। उन्होंने सोचा कि इनको शिक्षित करने से बेतहर कोई काम नहीं होगा, जो भविष्य में इनकी मदद करेगा।
करीब दो महाने के बाद छात्रावास के दूसरे छात्रों ने भी बच्चों को शिक्षित करने में शर्मा की मदद शुरू कर दी। शोध छात्र धनंजय यादव कहते हैं कि बच्चों को पढ़ाने के अलावा उन्हें कापी, किताब और खिलौने भी दिए जाते हैं ताकि पढ़ाई के प्रति उनका रुझान बना रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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