कश्मीर : बंकर हटाने से हुई मरहम लगाने की शुरुआत (राउंडअप)
उधर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत किया तो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए युवकों की तत्काल रिहाई की मांग की।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "श्रीनगर शहर में बने 16 बंकरों को हटाने का निर्णय लिया गया है।" शहर के लाल चौक से आधा किलोमीटर से भी कम दूरी पर व्यस्त मागरमल बाग इलाके में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के बंकर को सबसे पहले हटाया जाएगा। बंकर हटाने का निर्णय पिछले सप्ताह सुरक्षाबलों के संयुक्त मुख्यालय में हुई बैठक में लिया गया था।
प्रशासन ने अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी की विरोध जुलूस निकालने की घोषणा के चलते नोहटा, रैनावाड़ी, एम. आर. गंज, सफा कादल, पारिमपोरा और खन्यार पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया है। एक अधिकारी ने कहा कि प्रशासन इन इलाकों में कर्फ्यू लागू कराने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।
इसके अलावा सोपोर कुपवाड़ा और हंदवाड़ा कस्बों में भी कर्फ्यू लगाया गया है और उत्तर कश्मीर के बारामूला, पलहालन और देलिना कस्बों में प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
उधर, नई दिल्ली में कांग्रेस की स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में जम्मू एवं कश्मीर के मसले पर चर्चा के दौरान सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की ओर से आठ सूत्रीय राहत पैकेज की घोषणा किए जाने के पहल का स्वागत किया।
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी जनार्दन द्विवेदी ने बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, "बैठक में जम्मू एवं कश्मीर में हिंसा की विभिन्न घटनाओं में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष ने जम्मू एवं कश्मीर में शांति बहाली के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का स्वागत किया।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गत पांच अक्टूबर को हुई सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के लिए वार्ताकारों का एक समूह गठित करने और हाल की पथराव की घटनाओं में गिरफ्तार किए गए युवकों को जल्द ही रिहा करने सहित आठ सूत्रीय राहत पैकेज की घोषणा की गई थी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने जम्मू एवं कश्मीर सरकार से वहां चार महीनों से चले आ रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को जल्द रिहा किए जाने की मांग की। पोलित ब्यूरो ने यह भी कहा कि एक राजनीतिक समिति ही वार्ता की शुरुआत करने की गंभीर पहल कर सकती है।
दो दिनों तक चली पोलितब्यूरो की बैठक के बाद माकपा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "राज्य सरकार को चार महीने से चले आ रहे प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को शीघ्र रिहा कर देना चाहिए। साथ ही आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों और घायलों को मुआवजा देना चाहिए।"
पोलित ब्यूरो ने जोर देकर कहा कि वहां के नागरिकों के लिए जिस तरह की सुरक्षा रणनीति अपनाई जा रही है, उसे बदले जाने की जरूरत है। बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित आठ सूत्रीय राहत पैकेज घाटी के लोगों के लिए पर्याप्त नहीं है।
पोलित ब्यूरो ने कश्मीरी पंडितों के लिए भी पुनर्वास पैकेज जारी किए जाने की वकालत की।
दूसरी तरफ, कश्मीर मसले का हल निकालने के लिए केंद्र सरकार के आठ सूत्रीय राहत पैकेज के विरोध में जम्मू का क्रांति दल भी शामिल हो गया। क्रांति दल ने इस फार्मूले को 'जम्मू विरोधी' और 'राष्ट्र विरोधी' करार दिया है।
क्रांति दल के अलावा शिवसेना, जम्मू स्टेट मोर्चा, जम्मू मुक्ति मोर्चा और दूसरे अन्य समूह भी गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा गत 25 सितंबर को घोषित इस पैकेज के विरोध में प्रदर्शन कर चुके हैं।
जम्मू के व्यापारियों और राजनीतिक दलों ने इस फार्मूले के विरोध में गत 30 सितंबर को हड़ताल की थी। उल्लेखनीय है कि गत् 11 जून से ही कश्मीर घाटी में हिंसा में अभी तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को कश्मीर में जारी हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहारते हुए सुरक्षाबलों पर दोष मढ़ने को मुख्यमंत्री की 'अनुभवहीनता' करार दिया है।
भाजपा के विधायक दल के नेता चमन लाल गुप्ता ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि कश्मीर में जारी हिसा के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के लिए सुरक्षाबलों को कैसे दोष दिया जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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