गुरमत संगीत ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
इस अवसर पर संगीत नाटक अकादेमी के सचिव जयंत कस्तूआर ने कहा कि गुरमत संगीत सहित इसी प्रकार की दूसरी प्रादेशिक परंपराएं भारतीय संगीत और साहित्य संपदा की अमूल्य धरोहर हैं जिनका राष्ट्रीय मानस से परिचय करवाना बेहद जरूरी है।
आज देशपर्व उत्सव का आरंभ प्रोफेसर करतार सिंह और समूह की ओर से पेश की गई गुरूग्रंथ साहिब की पवित्र पंक्तियों से हुई। इस अवसर पर उन्होंने गुरमत संगीत पर अपनी पांचवीं पुस्तक की एक प्रति संगीत नाटक अकादमी के सचिव जयंत कस्तूआर को भेंट की। पंजाबी भक्ति संगीत की दुनिया प्रोफेसर करतार सिंह एक जाना पहचाना नाम है। प्रोफेसर करतार सिंह 19 वें राष्ट्रमंडल खेलों के उपलक्ष्य में आयोजित देशपर्व उत्सव में अपनी प्रस्तुति से अत्यंत प्रसन्न थे।
आज इस उत्सव का केंद्र केवल नई दिल्ली ही नहीं था बल्कि उत्तरी दिल्ली स्थित कथक केंद्र में देशज खंड के तहत लोक नृत्य के रंगारंग और नयानाभिराम कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसमें राजस्थान का तेराताली, छत्तीसगढ़ का पंथी, अरूणाचल प्रदेश का रिकमपाड़ा, गोवा का समय नृत्य, मेघालय का खासी नृत्य, असम का बिहू और तमिलनाडु का करागम और कवड़ी मुख्य थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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