अयोध्या फैसला बाबरी विध्वंस के दोषियों को माफ नहीं करता : कांग्रेस (लीड-1)
कांग्रेस की संचालन समिति की मंगलवार को हुई बैठक के बाद पार्टी के मीडिया प्रभारी जनार्दन द्विवेदी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "अदालत का फैसला छह दिसम्बर, 1992 के बाबरी विध्वंस के शर्मनाक और आपराधिक कृत्य के लिए किसी को माफी नहीं देता। बाबरी विध्वंस के दोषियों को इसका नतीजा तो भुगतना ही चाहिए।"
उन्होंने कहा, "बैठक में पार्टी ने अयोध्या पर आए अदालत के फैसले का स्वागत किया है। वह इस फैसले का सम्मान करती है लेकिन फिर भी यदि किसी की पक्ष की ओर से इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाती है तो हमें उसके निर्णय की भी प्रतीक्षा करनी चाहिए।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी पक्षों से बातचीत और समझौते के द्वारा इसका हल निकालने के पहल का स्वागत करती है। द्विवेदी ने कहा कि अयोध्या पर आए उच्च न्यायालय के फैसले को साम्प्रदायिक ताकतों द्वारा तोड़-मरोड़कर पेश किया जाना राष्ट्र हित में नहीं है। इससे देश की शांति और सुरक्षा को नुकसान पहुंचेगा।
बैठक में हिंसाग्रस्त कश्मीर के लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने के मकसद से केंद्र सरकार द्वारा की गई पहल का कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को स्वागत किया।
द्विवेदी ने कहा, "बैठक में जम्मू एवं कश्मीर में हिंसा की विभिन्न घटनाओं में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष ने जम्मू एवं कश्मीर में शांति बहाली के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का स्वागत किया।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गत पांच अक्टूबर को हुई सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के लिए वार्ताकारों का एक समूह गठित करने और हाल की पथराव की घटनाओं में गिरफ्तार किए गए युवकों को जल्द ही रिहा करने सहित आठ सूत्रीय राहत पैकेज की घोषणा की गई थी।
कश्मीर घाटी में 11 जून से शुरू हुए हिंसा के दुष्चक्र के बाद एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश का दौरा किया था। पिछले तीन महीनों के दौरान सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वाली भीड़ पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। मृतकों में अधिकांश युवक और किशोर शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि अदालत का फैसला आने और केंद्र सरकार द्वारा जम्मू एवं कश्मीर के लिए आठ सूत्रीय राहत पैकेज की घोषणा किए के बाद कांग्रेस के इस सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था की पहली बैठक थी, जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया सहित संचालन समिति के 18 सदस्य मौजूद थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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