राष्ट्रमंडल खेल : भव्य आगाज का शंखनाद (राउंडअप)

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। गीत-नृत्य, रंग एवं संस्कृति तथा भारतीय परंपरा के साथ तकनीक का मिश्रण- ये सांसें थाम लेने वाले ऐसे दृश्य थे, जिसे भारत ने पूरी दुनिया के सामने रविवार की शाम परोसा। मौका था, राष्ट्रमंडल खेलों के 19वें आयोजन के औपचारिक आगाज का।

71 देशों के खिलाड़ियों, अधिकारियों, अतिथियों एवं दर्शकों से खचाखच भरे जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में यहां राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह पाटील और ब्रिटेन के राजकुमार चार्ल्स ने भव्य समारोह में खेलों के आयोजन के आगाज की औपचारिक घोषणा की।

राजकुमार चार्ल्स ने खेलों के उद्घाटन की घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेल उनके लिए जीवनभर यादगार रहेंगे, क्योंकि उन्होंने इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन का उद्घाटन किया है।

आयोजन में हिस्सा ले रही 71 टीमों में 19 अफ्रीका से, छह अमेरिका से, 15 कैरिबियाई, 10 यूरोप से और 13 ओसीनिया से हैं।

चार्ल्स ने कहा, "मैं खेलों के लिए अपनी शुभकामना देता हूं, मुझे भरोसा है कि यह मेरे लिए आजीवन यादगार होगा। माननीया राष्ट्रपति, महोदय और सम्मानित अतिथियों, मैं 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन की घोषणा करता हूं।"

भारत के विश्व कुश्ती चैम्पियन सुशील कुमार के हाथों क्वींस बैटन स्वीकार करते हुए चार्ल्स ने कहा कि वह महारानी की ओर से यहां उपस्थित होकर बहुत खुश हैं।

राजकुमार चार्ल्स की घोषणा के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने कहा, "राष्ट्रमंडल खेल 2010 दिल्ली के शुरुआत की घोषणा की जाती है।"

समारोह में राष्ट्रपति एवं राजकुमार चार्ल्स के अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जैक रॉग, राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के प्रमुख माइक फेनेल, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना और आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी शरीक हुए।

तीन घंटे तक चलने वाले उद्घाटन समारोह के दौरान लगभग 65,000 दर्शकों ने सांस रोककर कार्यक्रम का लुत्फ उठाया। दूसरी ओर, दुनियाभर के अरबों लोग टेलीविजन के जरिए इस समारोह के गवाह बने। अकेले भारत में लगभग 60 करोड़ लोगों ने इस कार्यक्रम को देखा।

शुभारंभ समारोह में शामिल विदेशी मेहमानों में न्यूजीलैंड के गवर्नर जनरल सर आनंद सत्यानंद, मोनाको के राजकुमार अल्बर्ट द्वितीय और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद तथा नौरू के राष्ट्रपति मरकस स्टीफन मौजूद रहे।

समारोह छह हिस्सों में हुआ। इसमें करीब 7,000 स्त्री-पुरुष और बच्चों ने हिस्सा लिया। इसके तहत 'रिद्म ऑफ इंडिया', 'स्वागतम', 'ट्री ऑफ नॉलेज', 'योगा', 'ग्रेट इंडियन जर्नी' जैसे कार्यक्रम शामिल थे। कार्यक्रम के अंतिम हिस्से में ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने राष्ट्रमंडल खेल का थीम सांग 'जियो-उठो-बढ़ो -जीतो' प्रस्तुत किया।

इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन को देशवासियों के लिए गौरव का क्षण बताया।

मनमोहन सिंह ने कहा, "भारत में आप सभी का स्वागत है! इन खेलों का स्वागत है! भारत के लोग इस ऐतिहासिक शहर में राष्ट्रमंडल खेलों को आयोजित कर प्रफुल्लित है। देशवासियों के लिए यह एक गौरव का क्षण है।"

सिंह ने कहा कि यह भागीदारी की भावना और खेलभावना है, जीतने या हारने की नहीं, और यही भावना राष्ट्रमंडल देशों को एक विशाल परिवार के रूप में एकजुट करती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये खेल देशों के बीच मित्रता की भावना बरकरार रखने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं।

सिंह ने कहा कि अगले दो सप्ताह मानव कौशल की प्रतिस्पर्धा के गवाह होंगे। भारत इस खेल आयोजन का जश्न मनाएगा।

खेलों के आयोजन में तमाम गडबड़ियों के लिए तमाम आलोचनाएं झेलने वाले, आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने कहा कि यह भारत का एक महान क्षण है और देश अब तक के सर्वोत्तम खेलों का आयोजन करेगा।

कलमाडी ने उद्घाटन समारोह में कहा, "सुरक्षा, स्वास्थ्य, बारिश, कुप्रचार और अधोसंरचना की चुनौतियों के बावजूद दिल्ली 2010 इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन है। जी हां, हमारा सपना साकार होने जा रहा है और भारत का महान क्षण यहां अंततोगत्वा उपस्थित हुआ है।"

कलमाडी ने कहा कि भारत ने सात सालों तक कड़ी मेहनत की है।

राष्ट्रमंडल खेल परिसंघ के प्रमुख, माइकल फेनेल ने भव्य आतिथ्य एवं गर्मजोशी के लिए भारतीय जनता को साधुवाद दिया। फेनेल ने कहा कि सभी टीमों के अधिकारी और खिलाड़ी इससे अभिभूत हुए हैं।

फेनेल ने कहा, "दिल्ली - तुमने अपनी पारंपरिक गर्मजोशी के साथ खिलाड़ियों और अधिकारियों का स्वागत किया है। आयोजन में हिस्सा ले रही सभी 71 टीमों के खिलाड़ी अच्छे आतिथ्य से अभिभूत हैं।"

फेनेल ने कहा, "मित्रता खेलों के जरिए निभाई जा सकती है। आने वाले दिनों में हम खिलाड़ियों के खेल के 11 शानदार दिनों को देखने जा रहे हैं। सभी खिलाड़ियों का एकमात्र अरमान अपने देश के लिए, अपने लिए और राष्ट्रमंडल के लिए कुछ बेहतर कर गुजरने का है।"

फेनेल ने खेलों के आयोजन के लिए अथक प्रयास करने हेतु आयोजन समिति को भी शुभकामनाएं दी।

खेलों के उद्घाटन की घोषणा के बाद देश के एक मात्र ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज, अभिनव बिंद्रा ने 71 देशों के 6,700 भागीदारों की ओर से खेलों के लिए शपथ ग्रहण किया।

बिंद्रा ने कहा, "हम घोषणा करते हैं कि हम सच्ची खेलभावना के साथ, उन नियमों का पालन करते हुए जिनसे वे शासित होते हैं और अपने राष्ट्रमंडल के सम्मान के लिए एवं खेल की महिमा बढ़ाने हेतु हम राष्ट्रमंडल खेल 2010 में भाग लेंगे।"

बिंद्रा ने बीजिंग में 10मीटर एयर राइफल शूटिंग में स्वर्ण पदक प्राप्त जीता था। बिंद्रा ने भारतीय दल का झंडा भी उठाया।

ज्ञात हो कि बिंद्रा दिवंगत कर्णी सिंह (1982 एशियाई खेल), विश्व चैंम्पियन पिस्तौल शूटर जशपाल राणा (1998 राष्ट्रमंडल खेल), और एथेन्स ओलंपिक में रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह के बाद चौथे भारतीय निशानेबाज हैं।

उद्घाटन समारोह के लिए नेहरू स्टेडियम के अंदर और बाहर सुरक्षा की इस कदर चाक-चौबंद व्यवस्था थी कि परिंदा भी पर न मार सके। दिल्ली पुलिस के साथ ही कई अर्धसैनिक बलों के लगभग 15,000 जवानों की तैनाती की गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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