जर्मनी के एकीकरण की 20वीं वार्षिकी

जर्मनी के एकीकरण की बीसवीं वार्षिकी पर ब्रिमेन में समारोह
जर्मनी आज देश के दोनों भागों के एकीकरण की 20वीं वार्षिकी मना रहा है.
जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल उत्तरी शहर ब्रिमेन में आयोजित होने वाले समारोह का उद्धाटन करेंगी जहां दसियों हज़ार लोग एकत्र हो रहे हैं.
बर्लिन दीवार ढहाए जाने के बाद तीन अक्तूबर 1990 को पूंजीवादी पश्चिम जर्मनी और साम्यवादी पूर्व जर्मनी का एकीकरण हुआ था.
रविवार को ही जर्मनी, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद लगे हरजाने की अंतिम किश्त भी अदा करने वाला है.
‘एकात्मता टैक्स’
बीसवीं शताब्दी के इस ऐतिहासिक मोड़ की 20वीं वार्षिकी मनाने के लिए जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल के साथ अन्य प्रमुख नेता भी ब्रिमेन में एकत्र हुए हैं.
यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष होज़े मैनुअल बरोसो और नेटो के महासचिव जनरल एंडर्स फ़ॉ रेसमसेन भी इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं.
राष्ट्रपति क्रिस्चियन वुल्फ़ ने प्रमुख समारोह में कहा कि एकीकृत जर्मनी में एक उन्मुक्त देशप्रेम और देश के प्रति वचनबद्धता का विकास हुआ है.
उन्होने देश की एकता पर बल देते हुए कहा कि इस्लाम जर्मनी का हिस्सा है और हम सबका सम्मान करते हैं.
एकीकरण की वार्षिकी की पूर्व संध्या पर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जर्मनी को बधाई भेजी और कहा कि जर्मनी अमरीका के ‘सबसे निकट और अच्छे मित्रों में से एक है’.
उन्होने कहा कि अमरीका “जर्मन नागरिकों के साहस और दृढ़ निश्चय का सम्मान करता है जिससे बर्लिन की दीवार ढह सकी और दशकों के पीड़ादायक और बनावटी विभाजन का अंत हो सका”.
पूर्व जर्मनी में पली बढ़ीं एंगेला मर्केल ने स्वतंत्रता संघर्ष के लिए पूर्वी जर्मनी के लोगों की प्रशंसा की.
उन्होने कहा, “उस समय पश्चिम जर्मनी के लोगों में पूर्व जर्मनी के लोगों के साथ एकात्मता की लहर आई थी. और दोनों के संयुक्त प्रयासों का ही ये परिणाम है कि हम अपने देश का पुनर्निर्माण कर सके और उसे दुनिया में आदर दिला सके”.
जब से दोनों हिस्सों का एकीकरण हुआ है तब से कोई 15 लाख लोग पूर्व से पश्चिमी हिस्से में आकर बस चुके हैं.
बीबीसी के स्टीवन एवन्स का कहना है कि कुछ जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि पश्चिम के कुछ लोगों में इस ‘एकात्मता टैक्स’ को लेकर असंतोष है जो उन्हे पूर्वी भाग के पुनर्निर्माण के लिए देना पड़ता है. लेकिन अधिकतर लोग देश के एकीकरण के पक्ष में हैं.
ब्रिमेन में हो रहे आयोजनों को लेकर भी सब ख़ुश नहीं हैं. शनिवार को कई सौ वामपंथी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हज़ारों पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्वक निबट गया.
हरजाने की अंतिम किश्त
रविवार को जर्मनी पर लगाए गए हरजाने की अंतिम किश्त भी अदा हो जाएगी.
सात करोड़ यूरो की इस किश्त के बाद जर्मनी अपने क़र्ज़ से मुक्त हो जाएगा.
सन 1919 में प्रथम विश्वयुद्ध के विजयी मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी पर ये हरजाना इसलिए लगाया था जिससे वो कमज़ोर पड़ जाए और फिर युद्ध की क्षमता विकसित न कर सके. उसे 100,000 टन सोने के मूल्य का हरजाना भरना था.
लेकिन इस योजना का उल्टा ही असर हुआ. आधुनिक इतिहासकारों का मानना है कि वर्साइ संधि के कारण ही दूसरे विश्वयुद्ध की नींव पड़ी.
जर्मनी को जो अपमान सहना पड़ा उससे हिटलर के हाथ मज़बूत हुए और उसने हरजाने की रक़म अदा करने से इंकार कर दिया.
दूसरे विश्वयुद्ध के समाप्त होने के बाद जर्मनी का विभाजन हो गया. लेकिन पश्चिम जर्मनी ने 1953 में अपना क़र्ज़ अदा करने पर सहमति व्यक्त की.
जो रक़म बची रही वो दरसल सूद था. ये सहमति हुई थी कि अगर कभी दोनों भागों का एकीकरण हुआ तो ये सूद अदा किया जाएगा.
सन 1990 में एकीकरण हुआ और 20 साल के भीतर इस सूद की अदाएगी पर समझौता हुआ.












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