राष्ट्रमंडल खेल : भारतीय खिलाड़ियों का सबसे ज्यादा पदक जीतने का लक्ष्य
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। सालभर के कड़े प्रशिक्षण के बाद राष्ट्रमंडल खेलों के सभी 17 खेलों में हिस्सा ले रहे भारतीय खिलाड़ी इन खेलों में ज्यादा से ज्यादा पदक जीतने की उम्मीद कर रहे हैं। भारत में वर्ष 1982 में संपन्न हुए एशियाई खेलों के बाद यहां आयोजित हो रही इस सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ी कुल 829 पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
भारत की ओर से खेलों में 619 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 379 पुरुष और 240 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। इस देश की एक करोड़ से अधिक की आबादी अपने घरेलू खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखना चाहेगी। जिससे कि खेलों के आयोजन से जुड़ी तैयारियों को लेकर हुई बदनामी को कुछ हद तक धोया जा सके।
मैनेचेस्टर में वर्ष 2002 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का अब तक का सबसे बढ़िया प्रदर्शन रहा है। इसमें भारत ने 69 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया था। इनमें 30 स्वर्ण, 22 रजत और 17 कांस्य पदक शामिल हैं।
वहीं वर्ष 2006 में मेलबर्न में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन थोड़ा निराशाजनक रहा। इसमें भारतीय दल ने 22 स्वर्ण,17 रजत और 10 कांस्य पदक सहित कुल 49 पदक जीते। लेकिन भारत चौथे पायदान पर बना रहा।
भारत में पहले राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हो रहा है। देश के खेल प्रमुखों का लक्ष्य कम से कम 100 पदक जीतकर तीसरा स्थान हासिल करना है।
फिलहाल देश को निशानेबाजी, बैडमिंटन, तीरंदाजी, टेनिस भारोत्तोलन और कुश्ती में सबसे ज्यादा पदक हासिल करने की उम्मीद है।
निशानेबाजी के क्षेत्र में भारतीय खिलाड़ी एक तरह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा बनाए हुए हैं।
भारत के 28 सदस्यीय निशानेबाजी टीम में वर्ष 2004 में एथेंस ओलंपिक में रजत पदक विजेता राज्यवधर्न सिंह राठौड़ और बीजिंग ओलंपकि में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले अभिनव बिंद्रा शामिल हैं। इसके अलावा शीर्ष वर्ग में प्रतिस्पर्धी गगन नारंग, रोरंजन सोधी, मानवजीत सिंह संधू, समरेश जंग और भारत की पहली महिला विश्व चैम्पियन तेजस्वनी सावंत हैं।
मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाजों ने 27 पदक जीते थे। जिनमें 16 स्वर्ण पदक शामिल है। पिस्टल निशानेबाज जंग ने पांच पदक अपनी झोली में डाले थे और वह सबसे अच्छे खिलाड़ी घोषित किए गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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