अवधारणाओं को बाजार-योग्य यंत्रों के रूप में बदलें : चव्हाण
चव्हाण ने खोजकर्ताओं से कहा कि वे सक्रियतापूर्वक निर्माताओं से जुड़ें ताकि समाज के फायदे के लिए उनकी अवधारणाओं को उपयोगी और बाजार-योग्य यंत्रों के रूप में बदला जा सके। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के 'बुजुर्गो के लिए तकनीकी सहायता कार्यक्रम' (टीआईई) का लक्ष्य देश में बुजुर्गो के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रौद्योगिकी अनुसंधान को बढ़ावा देना, प्रौद्योगिकी का विकास करना और उसे अपनाना है।
उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए एक अभिनव मिश्रित विधि तैयार करने के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए शिक्षाविद विजया मुले को स्वर्ण पुरस्कार भी प्रदान किया।
'बुजुर्ग की तरह सोचो' कार्यक्रम में प्रौद्योगिकीविदों, वास्तुकारों और उद्यमियों जैसे विभिन्न व्यवसायों से जुड़े 300 से भी अधिक लोगों ने इस कार्यशाला-सह-प्रदर्शनी में भाग लिया।
इस प्रदर्शनी में जिन प्रौद्योगिकियों को दर्शाया गया, उनमें मधुमेह जांच के लिए बिना इंजेक्शन की तकनीक, बुजुगोर्ं की देखभाल के लिए सचल इकाई की शीर्ष परियोजना, सहायक उपकरण, कूल्हा बचाव उपकरण, बुजुर्ग महिलाओं के लिए रसोई इकाई, मोड्यूलर स्नान स्टूल, सिंगल टच डायलर, बहु-विध सुविधायुक्त बिस्तर, सीढ़ी पर चढ़ने में मदद्गार वकर, सेंसर प्रणाली वाली मोड्यूलर व्हील चेयर, बुजुर्गो के लिए साइकिल आदि शमिल हैं। इस प्रकार की पहल में देश में पहली बार आईआईटी के छात्रों और शिक्षकों को शामिल किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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