अयोध्या फैसला : रामलला वहीं रहेंगे, विवादित भूमि 3 हिस्सों में बंटेगी (राउंडअप)
उच्च न्यायालय की ओर से आधिकारिक रूप से मीडिया के लिए जारी दो पृष्ठों के 'सार' के मुताबिक अदालत ने स्वीकार किया कि विवादास्पद स्थल भगवान राम का जन्म स्थान है और विवादास्पद इमारत बाबर द्वारा बनाई गई थी। इसके निर्माण का साल निश्चित नहीं है लेकिन इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ इसे बनाया गया था। इसलिए इसका चरित्र मस्जिद का नहीं हो सकता है।
इसके मुताबिक विवादास्पद ढांचे का निर्माण पुराने ढांचे के स्थान पर उसे ही तोड़कर किया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने प्रमाणित किया है कि वहां एक विशाल हिन्दू धार्मिक ढांचा था। मूर्तियां 22/23 दिसम्बर, 1949 को मध्य रात्रि को विवादास्पद ढांचे के मध्य गुंबद में रखी गई थीं।
वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर प्रसाद के मुताबिक तीन सदस्यीय पीठ के दो सदस्य, न्यायमूर्ति एस. यू. खान और न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा है कि भूमि को तीन हिस्सों में बांट दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विवादित स्थल पर तीन महीनों तक यथास्थिति बहाल रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति एस. यू. खान, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी. वी. शर्मा ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि रामलला की मूर्ति आज जहां विद्यमान है, उसे उस स्थान से नहीं हटाया जा सकता।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फैसले के बाद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को भारतीय संस्कृति की सर्वोच्च परंपरा के अनुसार सभी धर्मो एवं धार्मिक आस्थाओं के लिए आदर प्रदर्शित करना चाहिए।
सिंह ने लोगों से कहा कि उन्हें चौकस रहना चाहिए और विघटनकारी तत्वों को शांति एवं सद्भाव में खलल डालने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। "खासतौर से अफवाहों को लेकर आप सभी को सावधान रहना चाहिए जिसे विघटनकारी तत्व समुदायों के बीच तनाव पैदा करने के लिए फैला सकते हैं।"
उन्होंने कहा, "सभी वर्ग के लोगों से मेरी अपील है कि शांति एवं सौहाद्र्र बनाए रखें और भारतीय संस्कृति की सर्वोच्च परंपरा के अनुसार सभी धर्मो और धार्मिक आस्थाओं के प्रति सम्मान जाहिर करे।"
"मुझे देश की जनता में पूरा भरोसा है। मुझे अपने महान देश की धर्मनिरपेक्षता, भाईचारगी और सहिष्णुता में पूर्ण विश्वास है। मैं यह भी जानता हूं कि केवल गिने-चुने लोग ही ऐसे हैं, जो हमारे समाज में विभाजन पैदा करते हैं।"
बहरहाल, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अदालत के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। फैसले के बाद वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, "हम सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे।" उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी समुदाय विशेष की जीत नहीं है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।
भागवत ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, "ये जो फैसला है, इससे राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।"
उन्होंने कहा, "इस फैसले को विजय और पराजय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये सभी के लिए आवश्यक है कि पिछले कुछ वर्षो में जो कुछ कटुता और विषमता उत्पन्न हुई उसे भूलाकर सबको मिलजुलकर स्नेह भाव से राम मंदिर के निर्माण में जुट जाना चाहिए। राम राष्ट्रीय आस्था और राष्ट्रीय पहचान है और पिछली बातों को भुलाकर राष्ट्रीय एकता को दर्शाने का यह अवसर है।"
इस अवसर पर भागवत ने देश की जनता से शांति व आत्मीयता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, "किसी को ठेस पहुंचे ऐसी बात नहीं की जानी चाहिए।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि न्यायालय के फैसले से हिन्दुओं के इस अधिकार की पुष्टि हुई है कि गर्भ गृह पर एक भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। यह फैसला भगवान राम के जन्म स्थान पर भव्य राम मंदिर के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा मानती है कि इस फैसले से देश में राष्ट्रीय एकता के एक नए अध्याय और अंतर-सामुदायिक संबंधों के नए युग की शुरुआत होगी। भाजपा कृतज्ञ है कि देश ने अदालत के इस फैसले को परिपक्वता से स्वीकार किया है।
कांग्रेस ने कहा है कि इस निर्णय को सभी लोगों को स्वीकार करना चाहिए और संयम का परिचय देते हुए देश में शांति बनाए रखनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने संवाददाताओं से कहा, "हमारा पहले से ही यह कहना रहा है कि देश के सभी लोगों को न्यायपालिका में भरोसा रखना चाहिए। आज भी हमारी फिर यही अपील है कि सभी इस फैसले को स्वीकार करें।"
द्विवेदी ने कहा, "इस निर्णय के आने के बाद किसी को भी इसकी अनुचित व्याख्या, अफवाहें और दुष्प्रचार नहीं करना चाहिए। हम देश के सभी नागरिकों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील करते हैं। उम्मीद है कि देश में अमन का माहौल बरकरार रहेगा।"
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने अयोध्या मसले पर आए फैसले के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। अदालत के फैसले के मद्देनजर उन्होंने प्रदेश की जनता से साम्प्रदायिक सौहाद्र्र बनाए रखने की भी अपील की।
लखनऊ में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा, "अदालत द्वारा जो फैसला सुनाया गया है उसके क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार बाध्य होगी। " उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विवादित स्थल और उसके आसपास की 67 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधिग्रहण में है। उसकी सुरक्षा से लेकर अन्य संबंधित जिम्मेदारी भी केंद्र की है।
उन्होंने कहा, "राज्य सरकार ने फैसला किया है कि इस फैसले पर क्रियान्वयन के संबंध में आज ही प्रधानमंत्री को एक पत्र प्रेषित किया जाएगा और उसमें कहा जाएगा कि केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे और इस संबंध में यथोचित कार्रवाई करे।"
मायावती ने कहा, "समय रहते यदि केंद्र सरकार ने उचित कदम नहीं उठाया और राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो इसके लिए केंद्र सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार होगी।"
कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने फैसले को हिंदुओं व मुसलमानों के लिए सुलह और सद्भभाव के पथ पर आगे बढ़ने का एक शुभ संकेत बताया।
सीबीसीआई के प्रवक्ता बाबू जोसेफ ने आईएएनएस से कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि दोनों समुदायों के बीच शांति एवं सौहाद्र्र कायम होगा और इससे इस समस्या का कोई अंतिम समाधान निकालने का रास्ता साफ होगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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