अयोध्या मामला : अब निर्मोही अखाड़ा जाएगा सर्वोच्च न्यायालय (लीड-1)
निर्मोही अखाड़े के वकील रंजीत लाल वर्मा ने यह जानकारी सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल करने के लिए दिल्ली रवाना होने से ऐन पहले दी। लाल ने आईएएनएस को बताया, "फैसले को तीन महीने तक टालने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल करने के वास्ते मैं दिल्ली रवाना हो रहा हूं।"
वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा के सेवाकाल में विस्तार के लिए सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप करने का अनुरोध भी करने वाले हैं। न्यायमूर्ति शर्मा इसी महीने के आखिर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
न्यायमूर्ति शर्मा अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ के सदस्य हैं।
उच्च न्यायालय ने गत 27 जुलाई को इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था और फैसला सुनाने की तारीख 24 सितम्बर तय की गई थी।
बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाने पर 28 सितम्बर तक की रोक लगा दी थी। न्यायालय अब त्रिपाठी की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने वाला है।
त्रिपाठी ने अपनी अर्जी में सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला कम से कम तीन से 14 अक्टूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के संपन्न होने तक रोक लिया जाए। उन्होंने न्यायालय से सम्बद्ध पक्षों को यह निर्देश देने को भी कहा था कि वे अदालत से बाहर इस मसले के सौहार्दपूर्वक हल की संभावनाएं तलाशे।
इससे पहले त्रिपाठी की याचिका उच्च न्यायालय ने दो सप्ताह पूर्व खारिज कर दी थी। पीठ के दो सदस्य न्यायमूर्ति एस.यू.खान और न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी जबकि न्यायमूर्ति शर्मा ने उसे सुनवाई के लिए स्वीकृत कर लिया था। उच्च न्यायालय ने त्रिपाठी पर 50,000 रुपये जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद त्रिपाठी सर्वोच्च न्यायालय चले गए थे।
बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि मालिकाना हक मामले में निर्मोही अखाड़ा एक प्रमुख पक्षकार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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