गेंहूं, चावल के मंहगे होने का डर

गेंहूं, चावल के मंहगे होने का डर

संयुक्त राष्ट्र की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन (एफ़एओ) की एक महत्वपूर्ण बैठक रोम में हो रही है जिसमें दुनिया भर में अनाज की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ने की आशंका पर विचार किया जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र ने इस बैठक के बारे में कहा है कि "चावल और गेहूँ की क़ीमतों को क़ाबू में रखने के बारे में दुनिया भर के विशेषज्ञ गंभीर चर्चा करेंगे".

इस बैठक में रूसी कृषि विभाग के अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं, रूस ने इस वर्ष गेहूँ के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है जिससे गेहूँ की क़ीमतें बहुत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

अनाज की क़ीमतों में अगर और बढ़ोतरी होती है तो विकासशील देशों के ग़रीब लोग आर्थिक बोझ सहन नहीं कर सकेंगे.

रूस में भीषण गर्मी पड़ने की वजह से गेहूँ की फ़सल बुरी तरह प्रभावित हुई थी जिसके बाद यह निर्णय लिया गया था.

इसके अलावा चीन और पाकिस्तान में आई बाढ़ की वजह से भी गेहूँ की फ़सल तबाह हुई है जबकि पाकिस्तान गेहूँ की सबसे अधिक खपत वाले देशों में है.

वर्ष 2007-08 की तरह ही फिर से बहुत तेज़ी से अनाज की क़ीमतें बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही हैं.

अनाज की क़ीमतों की वजह से मोज़ाम्बिक में दंगे तक भड़क चुके हैं और कई अन्य देशों में ग़रीब लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसे एफ़एओ ने आपात बैठक नहीं कहा है क्योंकि वे दुनिया भर में घबराहट नहीं फैलाना चाहते लेकिन स्थिति सचमुच चिंताजनक है.

एफ़एओ का कहना है कि स्थिति 2007-08 की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी से क़ीमतों पर लगाम लगाने की योजना बनाने की ज़रूरत है.

दुनिया भर में अनाज की क़ीमतें अपने अधिकतम स्तर पर हैं और अब भी उनमें वृद्धि लगातार जारी है. पिछले साल के मुक़ाबले अनाज की क़ीमतों के एफ़एओ के सूचकांक में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

एफ़एओ का कहना है कि सरकारों को आपात स्थिति के लिए स्टॉक रखना चाहिए और खाद्यान्न के बाज़ार पर नियंत्रण और नियमन बढ़ाना चाहिए.

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